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जिला न्यायालय दुर्ग में “ग्रीन दीपावली” कार्यशाला का आयोजन
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 16 अक्टूबर 2025,  10:26 PM IST
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जिला न्यायालय दुर्ग में “ग्रीन दीपावली” कार्यशाला का आयोजन

न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पैरालीगल वॉलेंटियर्स ने लिया प्रदूषण-मुक्त दीपावली मनाने का संकल्प
दुर्ग। 
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जनजागरूकता लाने के उद्देश्य से जिला न्यायालय दुर्ग में 16 अक्टूबर 2025 को “ग्रीन दीपावली मनाएं – प्रदूषण मुक्त दीप जलाएं” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के संयुक्त तत्वाधान में न्यायालय परिसर स्थित नवीन सभागार में संपन्न हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं “ग्रीन दीपावली” के संकल्प के साथ किया गया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारीगण, न्यायालयीन कर्मचारीगण तथा पैरालीगल वॉलेंटियर्स (PLVs) बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यशाला में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश थॉमस एक्का तथा जिला न्यायालय के उच्च न्यायिक सेवा अधिकारी प्रशांत पाराशर ने दीपावली के दौरान पटाखों से उत्पन्न ध्वनि एवं वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेज आवाज वाले फटाखों एवं धुएं से पशु-पक्षियों, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य हानि होती है।
श्री पाराशर ने वैज्ञानिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि दीपावली के दौरान फोड़े जाने वाले पटाखों से PM 2.5 प्रदूषक का स्तर सामान्य से दस गुना तक बढ़ जाता है। इन धुएँ में सल्फर, जिंक, कॉपर, लेड, पोटेशियम नाइट्रेट, आर्सेनिक जैसे हानिकारक रसायन होते हैं, जो साँस के साथ फेफड़ों तक पहुँचकर दम घुटने, अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को ग्रीन दीपावली मनाने के व्यावहारिक उपायों से भी अवगत कराया गया — जैसे स्थानीय उत्पादों का उपयोग, मिट्टी के दीयों से दीप सजाना, ताजे फूलों से साज-सज्जा, प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाना, अपशिष्ट प्रबंधन एवं वृक्षारोपण। वक्ताओं ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए।
कार्यशाला के अंत में सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे इस दीपावली को “ग्रीन दीपावली” के रूप में मनाएंगे, पटाखों का उपयोग नहीं करेंगे और समाज में पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएंगे।

यह आयोजन माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों से प्रेरित होकर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक परिवार एवं समाज के बीच पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना और प्रदूषण मुक्त दीपावली की दिशा में एक सकारात्मक पहल करना था।
कार्यशाला के सफल आयोजन पर जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम को सराहना प्राप्त हुई।

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