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NSUI ने CM को पत्र भेज की FIR की मांग:VIT में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था क्लिनिक, ना इलाज और ना ही मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 8 दिसम्बर 2025,  07:00 PM IST
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NSUI ने CM को पत्र भेज की FIR की मांग:VIT में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था क्लिनिक, ना इलाज और ना ही मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था

वीआईटी विश्वविद्यालय परिसर में हाल ही में हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटना के बाद स्थिति अब तक सामान्य नहीं हुई हैं। इधर, अब परिसर में बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहे क्लिनिक को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

उच्च शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वीआईटी में बिना रजिस्ट्रेशन के क्लिनिक संचालित हो रहा था। उसमें इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं थी और ना ही मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के पुख्ता इंतजाम थे।

इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए अब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने इसे छात्रों व स्टाफ की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ बताया है।

इस संबंध में NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को शिकायत कर तत्काल FIR दर्ज करने, क्लिनिक को सील करने और जिम्मेदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

जानकारी शासन के दस्तावेजों में दर्ज परमार ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी के पत्र में स्पष्ट स्वीकार किया गया कि वीआईटी विश्वविद्यालय ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सीहोर से कोई अनुमति नहीं ली गई।

साथ ही, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से भी कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र या लाइसेंस प्राप्त नहीं किया गया। यह जानकारी स्वयं शासन के दस्तावेज में दर्ज है। जिससे साबित होता है कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर संचालित क्लिनिक पूरी तरह गैरकानूनी है।

अव्यवस्थाओं से नाराज छात्रों ने जमकर हंगामा किया था।

अव्यवस्थाओं से नाराज छात्रों ने जमकर हंगामा किया था।

इसी लापरवाही से बिगड़ी 35 छात्रों की हालत NSUI ने पत्र लिखा कि क्लिनिक में तैनात अनधिकृत और अप्रमाणित स्वास्थ्यकर्मी की गंभीर लापरवाही के कारण लगभग 35 छात्र छात्राएं गंभीर बीमारी का शिकार हो गए। बिना वैध अनुमति, बिना योग्य चिकित्सकीय स्टाफ और बिना मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलाए जा रहे इस क्लिनिक में गलत उपचार तथा असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों के चलते छात्रों की हालत लगातार बिगड़ती रही। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि इलाज में देरी और गलत दवाइयों के कारण एक छात्र की दर्दनाक मृत्यु हो गई। यह घटना विश्वविद्यालय कुप्रबंधन एवं लापरवाही को उजागर करती है ।धिकारियों पर अपराध दर्ज किया जाए।

  • छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्लिनिक को तुरंत सील किया जाए।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश और निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाए। 


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