इंदौर में सीमेंट कांक्रीट सड़कों(सीसी रोड) के नाम पर बड़ी साजिश सामने आई है। निगम अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ से हुए 800 करोड़ के घोटाले की परतें उखड़ने लगी हैं। दरअसल, निगम ने पिछले पांच सालों में सीमेंट सड़कें बनाने के नाम पर 800 करोड़ खर्च कर दिए। पड़ताल में खुलासा हुआ कि निगम ने ज्यादातर उन्हीं सड़कों को तोड़कर दोबारा बनवाया, जो पहले से ही सीसी थीं।
खास बात यह है कि इंदौर में सीसी रोड में खराबी के लिए ठेकेदार की जिम्मेदारी यानी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) सिर्फ 3 साल रखा गया है। जबकि भोपाल, सूरत सहित देश के 25 बड़े शहरों में यह 5 से 10 साल तक है।
2021 में अधीक्षण यंत्री रहे अशोक राठौर के अनुसार तब कुल 3792 किमी सड़कों में से 3424 किमी (90%) सड़कें सीसी थीं। इधर, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर के मुताबिक सितंबर 2026 में शहर में लगभग 3800 किमी कुल सड़कों में 10% डामर की सड़कें हैं।
एक्सपर्ट - एनएस तोमर, पूर्व अधीक्षण यंत्री, इंदौर नगर निगम
3 साल तो डामर सड़कों की डीएलपी होती है
सीमेंट सड़कों की लाइफ दस साल से ज्यादा होती है। इसके बावजूद हम पहले कम से कम 5 साल डीएलपी रखते थे। अब पता नहीं क्यों इसे तीन साल कर दिया गया। तीन साल तो डामर सड़कों की होती है। नवी मुंबई में तो डीएलपी 10 साल रखी गई है।
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