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महिला सुरक्षा से नशा मुक्ति तक: अब रिसर्च के आधार पर बदलेगी मध्यप्रदेश पुलिस की रणनीति
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 17 अक्टूबर 2026,  10:33 PM IST
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महिला सुरक्षा से नशा मुक्ति तक: अब रिसर्च के आधार पर बदलेगी मध्यप्रदेश पुलिस की रणनीति

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस अब सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम, महिला सुरक्षा, जन-जागरूकता अभियानों और आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की प्रभावशीलता का आकलन अनुसंधान के आधार पर करेगी। इसके लिए पुलिस की PARIMAL पहल के माध्यम से विभिन्न अध्ययन और सर्वेक्षण किए जा रहे हैं। इनमें छात्राओं से छेड़छाड़ और पीछा करने की घटनाओं की रोकथाम, ‘नातरा-झगड़ा’ जैसी सामाजिक कुरीतियों पर नियंत्रण, ‘सेफ क्लिक’ और ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियानों के प्रभाव तथा डायल-112 जैसी पुलिस सेवाओं की उपयोगिता का अध्ययन शामिल है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भी सर्वेक्षण कराया जाएगा।

रिसर्च से तय होगी पुलिसिंग की नई रणनीति

मध्यप्रदेश पुलिस का उद्देश्य अनुसंधान, तथ्यों के विश्लेषण और समुदाय की भागीदारी के आधार पर पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाना है। PARIMAL (प्रैक्टिशनर और शिक्षाविदों के सहयोग से बहुविषयक कार्य-आधारित अनुसंधान पहल) के माध्यम से किए जा रहे अध्ययनों से यह समझने का प्रयास होगा कि पुलिस की मौजूदा योजनाओं और व्यवस्थाओं का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ रहा है

इस पहल से संबंधित चर्चा के दौरान पुलिस महानिरीक्षक डॉ. आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक रियाज इकबाल, राजेश चंदेल, किरण लता केरकट्टा, पुलिस महानिदेशक के विशेष कार्य अधिकारी मलय जैन और सहायक पुलिस महानिरीक्षक ऋचा चौबे उपस्थित रहीं। सीमा अलावा और शशांक गर्ग ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

‘नातरा-झगड़ा’ जैसी सामाजिक कुरीतियों पर होगा अध्ययन

मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग इकाई के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA), PARIMAL और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के शोध सहयोग से ‘नातरा-झगड़ा’ जैसी हानिकारक सामाजिक प्रथाओं की रोकथाम पर अध्ययन किया जा रहा है।

इस शोध के जरिए ऐसी प्रथाओं के पीछे की सामाजिक परिस्थितियों को समझने और समुदाय की भागीदारी से रोकथाम के प्रभावी उपाय विकसित करने का प्रयास होगा। अध्ययन में आईपीएस डॉ. विनीत कपूर और सहायक प्राध्यापक तसनीम देव प्रमुख शोधकर्ता हैं। हिमांशी, मोहित सोने, राहुल सिंह और आरक्षक ऋषि शुक्ला भी शोध कार्य में सहयोग कर रहे हैं।

छात्राओं की सुरक्षा के लिए छेड़छाड़ और पीछा करने की घटनाओं पर नजर

भोपाल में छात्राओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न और पीछा करने की घटनाओं को रोकने के लिए समस्या-आधारित पुलिसिंग पर शोध किया जा रहा है। PARIMAL और न्यूयॉर्क की सिटी यूनिवर्सिटी के जॉन जे कॉलेज ऑफ क्रिमिनल जस्टिस के सहयोग से होने वाले इस अध्ययन में घटनाओं के स्वरूप और उनसे जुड़ी परिस्थितियों का विश्लेषण किया जाएगा।

शोध का नेतृत्व आईपीएस दीपिका सूरी कर रही हैं। प्रोफेसर नटराजन स्वैच्छिक शैक्षणिक सहयोग दे रहे हैं, जबकि आईपीएस डॉ. विनीत कपूर, अंजलि सिंह और राहुल सिंह भी अध्ययन में योगदान दे रहे हैं। इसका उद्देश्य समस्या की पहचान कर रोकथाम के व्यावहारिक उपाय तैयार करना है।

‘सेफ क्लिक’ और नशा मुक्ति अभियान का आकलन

  • मध्यप्रदेश पुलिस के जन-जागरूकता अभियानों का नागरिकों पर पड़ने वाला प्रभाव भी जांचा जाएगा। इसके तहत दो प्रमुख अभियानों पर विशेष अध्ययन होगा।
  • सेफ क्लिक अभियान: इसका उद्देश्य नागरिकों में जागरूकता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रयासों के प्रभाव का आकलन करना है।

‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान: इसके माध्यम से यह समझने का प्रयास होगा कि नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे जागरूकता अभियान नागरिकों की सोच, व्यवहार और भागीदारी पर कितना असर डाल रहे हैं। अध्ययनों से मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में अभियानों की पहुंच बढ़ाने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के उपाय तय किए जा सकेंगे।

NAFIS, CCTNS और डायल-112 की उपयोगिता भी परखी जाएगी

पुलिस व्यवस्था में तकनीक की भूमिका समझने के लिए NAFIS, CCTNS, ICJS और डायल-112 जैसी प्रणालियों के प्रभाव का अध्ययन प्रस्तावित है। इसके लिए मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) के अनुसंधान केंद्र और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग किया जाएगा।

अध्ययन में इन प्रणालियों की उपयोगिता, कार्यक्षमता और पुलिस सेवाओं को अधिक सुगम बनाने में उनकी भूमिका का विश्लेषण किया जाएगा। इससे तकनीकी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और पुलिस कार्यप्रणाली में जरूरी सुधारों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

सिंहस्थ-2028 के लिए पुलिस अधिकारियों का सर्वेक्षण

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को देखते हुए पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता और कार्यप्रणाली का आकलन करने के लिए PARIMAL के माध्यम से सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसमें अधिकारियों की जिम्मेदारियों, उपलब्ध संसाधनों, कार्य-प्रक्रियाओं, आपसी समन्वय और प्रशिक्षण से जुड़ी जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा।

सर्वेक्षण से प्राप्त तथ्यों के आधार पर पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और इतने बड़े आयोजन के लिए पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने के सुझाव तैयार किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश पुलिस की इस पहल का लक्ष्य तथ्यों और शोध के आधार पर बेहतर निर्णय लेना, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना और नागरिकों को अधिक जवाबदेह तथा प्रभावी पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराना है

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