देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 100 फीसदी एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों (E100) को अनुमति दी है। हालांकि, इस फैसले को लेकर अब देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल वितरण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र से पूछा कि इतनी बड़ी मात्रा में आवश्यक ईंधन की सतत आपूर्ति का क्या तंत्र है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि यह मामला सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के सीधे मुनाफे से भी जुड़ा है।
गाड़ियों और ईंधन तक सीमित नहीं नीति, किसानों का हित सर्वोपरि
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस नीति को केवल वाहनों के संचालन के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। अदालत ने कहा कि इसके साथ पर्यावरण की सुरक्षा, नागरिकों की भलाई और अन्नदाताओं की माली हालत जैसे बुनियादी पहलू जुड़े हैं। पीठ ने कहा कि ग्रामीण इलाकों के किसानों को इस पूरी हरित ईंधन नीति का सीधा और पारदर्शी लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल बिचौलियों या कंपनियों को इसका फायदा पहुंचे।
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को दिया भरोसा, नवंबर में पेश होगा पूरा रोडमैप
अदालत के सवालों पर केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ को आश्वस्त किया कि बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन और वितरण तंत्र को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिया कि अगली सुनवाई के दौरान सरकार किसानों के हितों, उनकी आमदनी में बढ़ोतरी और आपूर्ति के विस्तृत रोडमैप को बिंदुवार तरीके से अदालत के समक्ष पेश करेगी।
मोटर वाहन नियमों में संशोधन और E100 व्यवस्था का विवाद
यह पूरा मामला सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर शत-प्रतिशत एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को मंजूरी देने के बाद चर्चा में आया है। वर्तमान में उपलब्ध E85 ईंधन में 85 फीसदी एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है, जबकि E100 पूरी तरह जैव ईंधन पर निर्भर व्यवस्था है। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल सम्मिश्रण (Blending) के मौजूदा लक्ष्य को फिलहाल तुरंत आगे बढ़ाने की योजना नहीं है।
तेल कंपनियों और उत्पादकों के बीच कोटा विवाद पर नवंबर में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में यह विवाद मुख्य रूप से एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए तेल कंपनियों और उत्पादन इकाइयों के बीच आवंटन से जुड़ा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व में तेल कंपनियों को उत्पादकों का कोटा बढ़ाने का निर्देश दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। कंपनियों का तर्क था कि अनियंत्रित आवंटन से राष्ट्रीय सम्मिश्रण नीति प्रभावित होगी। अब इस मामले की अगली निर्णायक सुनवाई नवंबर में तय की गई है।
ज्वाला प्रसाद अग्रवाल, कार्यालय शाप न. 2 संतोषी मंदिर परिसर,गया नगर दुर्ग , छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001
+91 99935 90905
amulybharat.in@gmail.com
बैंक का नाम : IDBI BANK
खाता नं. : 525104000006026
IFS CODE: IBKL0000525
Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 49001
Copyright © Amuly Bharat News ©2023-24. All rights reserved | Designed by Global Infotech
Add Comment