नई दिल्ली। बच्चों में फाइनेंशियल समझ और जिम्मेदारी विकसित करना आज के समय में बेहद जरूरी है। पॉकेट मनी न सिर्फ उन्हें खर्च और बचत का संतुलन सिखाती है, बल्कि सही फैसले लेने, प्राथमिकताएं तय करने और आत्मनिर्भर बनने की क्षमता भी बढ़ाती है।
सही उम्र में बच्चों को वित्तीय अनुशासन सिखाने में पॉकेट मनी काफी मदद कर सकती है। लेकिन इसके लिए यहां बताए गए कुछ जरूरी पॉइंट्स को समझना होगा, आइए जानते हैं इनके बारे में।
बच्चों को कैसे दें सही पॉकेट मनी?
- सही उम्र पर शुरुआत- बच्चों को लगभग 5-6 साल की उम्र से पॉकेट मनी देना शुरू किया जा सकता है। इस उम्र में बच्चे छोटी-छोटी चीजों जैसे कैंडी, स्टेशनरी या छोटे खिलौने खरीदने में सक्षम होते हैं। शुरुआती राशि छोटी होनी चाहिए, जैसे सप्ताह में 10-20 रुपये।
- धीरे-धीरे राशि बढ़ाना- जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं और उनकी जरूरतें बढ़ती हैं, पॉकेट मनी की राशि भी बढ़ाई जा सकती है। 8-10 साल की उम्र में इसे 50' रुपये तक बढ़ाना सही रहता है। इससे बच्चे समझते हैं कि पैसे सीमित संसाधन हैं और उनका सही इस्तेमाल करना जरूरी है।
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- बजट बनाने की आदत- पॉकेट मनी बच्चों में बजट बनाने की आदत डालती है। जब बच्चे तय राशि में अपनी जरूरतें पूरी करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें प्राथमिकताओं को समझना और गैर-जरूरी खर्च से बचना आता है।
- बचत की आदत- पॉकेट मनी से बच्चे यह सीखते हैं कि बड़ी चीज खरीदने के लिए पैसे बचाने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई बच्चा नया खिलौना खरीदना चाहता है, तो उसे अपने पॉकेट मनी में से कुछ बचत करनी होगी।
- निर्णय लेने और आत्मनिर्भरता- छोटी-छोटी खरीदारी के दौरान बच्चे सही ऑप्शन चुनना सीखते हैं। यह अनुभव उनके भविष्य के वित्तीय निर्णयों में भी मदद करता है। माता-पिता को मार्गदर्शन देना चाहिए, लेकिन हर खर्च पर रोक नहीं लगानी चाहिए।
- जिम्मेदारी और अनुशासन- जब बच्चे जानते हैं कि उनके पास सीमित पैसे हैं, तो वे सोच-समझकर खर्च करते हैं। यह उनके आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता की भावना को भी बढ़ाता है।
- जीवन कौशल में सुधार- पॉकेट मनी बच्चों को पैसे का महत्व, वित्तीय योजना और निर्णय लेने की कला सिखाती है। ये कौशल उनके भविष्य में फाइनेंशियल रूप से समझदार और आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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