• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
ताज़ा समाचार और भी
रायपुर साहित्य उत्सव में जितने साहित्य के रंग बिखरे, उतने ही चित्रकला के भी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 25 जनवरी 2026,  04:20 PM IST
  • 120
रायपुर साहित्य उत्सव में जितने साहित्य के रंग बिखरे, उतने ही चित्रकला के भी

सुरेंद्र दुबे मंडप में चित्रकला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, सेल्फी का बनी हाटस्पाट*

रायपुर / पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में जितने रंग साहित्य के बिखरे हैं उतने ही रंग तस्वीरों के भी हैं। सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ की भव्य विविधता को दिखाती सुंदर चित्रों की प्रदर्शनी मन मोह लेती है। मंडप की पहली ही तस्वीर जो अपना ध्यान खींचती है वो है छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर। छत्तीसगढ़ महतारी के एक हाथ में पंडवानी का तंबूरा है और दूसरे हाथ में हंसिया है। एक हाथ में धान की बाली है और एक हाथ से वो आशीर्वाद दे रही हैं।

 छत्तीसगढ़ महतारी की इस तस्वीर को देखकर मन मुग्ध हो जाता है। यह तस्वीर रायपुर की कलाकार श्रीमती सोनल शर्मा ने तैयार की है। इसके बाद अवध कंवर का चित्र हमारी आंखों के सामने आ जाता है जिसमें बस्तर का बाजार जीवंत हो जाता है। ऐसा लगता है कि लाला जगदलपुरी और विनोद कुमार शुक्ल की कविता पेंटिंग का स्वरूप ले चुकी हैं। जांजगीर की कलाकार दिव्या चंद्रा ने राजिम कुंभ का चित्र बनाया है। राजिम कुंभ अपनी पूरी दिव्यता में इस चित्र में प्रगट होता है जब यह चित्र देखते हैं तो तीर्थ की उष्मा महसूस होने लगती है।

रामगढ़ की पहाड़ियों को जिन्होंने नहीं देखा, वो बिल्कुल सजीव रूप में यहां इसके चित्र में बनाती है और चित्र में ऐसा जादू है कि महसूस करेंगे कि इसी जगह पर कालिदास ने पहली बार मेघ को देखा होगा और उनकी अमर कृति मेघदूतं का पहला प्लाट यहीं तैयार हुआ होगा।

कार्यशाला के संयोजक भोजराज धनगर ने बताया कि नवा रायपुर, अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत सुरेंद्र दुबे मंडप में छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजीवन को दर्शाती विविध चित्रकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो दर्शकों को छत्तीसगढ़ की आत्मा से जोड़ती हैं।

 चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ सुरेंद्र दुबे मंडप में पेंटिंग कार्यशाला एवं कार्टून कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों से प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यशालाओं में रंगों की तकनीक, रेखांकन, भाव-प्रस्तुति तथा सामाजिक विषयों पर कार्टून निर्माण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

साहित्य उत्सव में चित्रकला के प्रति रुचि रखने वाले साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम दर्शकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कला और साहित्य के इस संगम ने उत्सव को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है, जहां शब्दों के साथ-साथ रंगों के माध्यम से भी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हो रही है।

RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40

RO. NO 13404/ 40

Add Comment


Add Comment

629151020250338041002855468.jpg
RO. NO 13404/ 40
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 40
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg
RO. NO 13404/ 40
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 40
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter