हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। यह त्योहार हर साल चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। वहीं इस त्योहार को बुराई की अच्छाई पर जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। होलिका दहन के दौरान घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं इस साल होली के त्योहार को लेकर इस बार बहुत ही बड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। दरअसल, इसके पीछे कारण पूर्णिमा तिथि का 2 और 3 मार्च को होना और चंद्रग्रहण है। फ्यूचर पंचांग के अनुसार जानते हैं होलिका दहन की सही तारीख, महत्व और मुहूर्त…
फ्यूचर पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत शाम में 5 बजकर 56 मिनट पर हो रही है और 3 तारीख को पूर्णिमा तिथि शाम में 5 बजकर 8 मिनट पर खत्म हो जाएगी। ऐसे में होलिका दहन का पर्व 2 तारीख को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार विधान है कि जिस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि लगती है तब होलिका दहन किया जाता है।
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक 3 मार्च की शाम चंद्रग्रहण पड़ता। ज्योतिष के अनुसार ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाते हैं। वहीं सूतक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। इसी कारण 3 मार्च को रंगोत्सव न मनाकर 4 मार्च को होली खेलना शास्त्रसम्मत रहेगा, या फिर ग्रहण 3 मार्च को शाम को 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो रहा है। इसलिए ग्रहण के बाद रंग वाली होली खेली जा सकती है।
होली के दिन हनुमान जी और भोलेनाथ की विशेष पूजा- अर्चना करने का विधान है। मान्यता है जो भी व्यक्ति होली वाले दिन हनुमान जी और भोलेनाथ की विशेष पूजा करता है, उसके जीवन में सुख- समृद्धि का वास बना रहता है। साथ ही उसको कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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