दुर्ग/ स्थानीय शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 09 मार्च 2026 को "महिलाओं के कानूनी अधिकार" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला महाविद्यालय की विशाखा समिति एवं समान अवसर प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सेमिनार हॉल में प्रातः 11:30 बजे किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसके पश्चात अतिथियों का परिचय एवं स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में दुर्ग की उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती भारती मरकाम तथा सुश्री भाग्यश्री नातू (असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल, दुर्ग) उपस्थित रहीं। दोनों वक्ताओं ने छात्राओं को उनके मौलिक एवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में समान अवसर प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. दिव्या कुमुदिनी मिंज द्वारा अत्यंत प्रभावपूर्ण एवं प्रेरणादायी स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित मुख्य अतिथियों, प्राध्यापकगणों एवं छात्र-छात्राओं का हार्दिक स्वागत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों एवं उपलब्ध न्यायिक सहायता के प्रति जागरूक करती हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, आत्मसम्मान तथा आत्मनिर्भरता की भावना को भी सुदृढ़ करती हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी जागरूकता से भी सशक्त बनाएं। अपने स्वागत उद्बोधन के माध्यम से उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, उसकी प्रासंगिकता तथा छात्राओं के समग्र सशक्तिकरण में ऐसे आयोजनों की भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी छात्राओं को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सजग, आत्मविश्वासी और सशक्त नागरिक बनने के लिए प्रेरित करेगी।
इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय कुमार सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए विश्व की अनेक प्रेरणादायी महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सशक्त भूमिका निभा रही हैं और घर से लेकर कार्यस्थल तक उनकी सहभागिता निरंतर बढ़ रही है।
मुख्य अतिथि नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती भारती मरकाम ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण के व्यापक आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "सशक्तिकरण केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज और पुरुषों की समान भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है।" उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों एवं साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए छात्राओं को साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं तथा सावधानियों से अवगत कराया, ताकि वे डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकें।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के अंतर्गत संचालित लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की सहायक कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता सुश्री भाग्यश्री नातू ने महिला सुरक्षा एवं अधिकारों से संबंधित विभिन्न विधिक प्रावधानों तथा न्यायालय द्वारा प्रदत्त संरक्षणात्मक कानूनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी अवगत कराया।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. तरलोचन कौर संधु द्वारा अत्यंत प्रभावी एवं उत्साहपूर्ण ढंग से किया गया। कार्यशाला के आयोजन में विभिन्न समितियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योजना एवं समन्वय का दायित्व डॉ. पद्मावती, डॉ. दिव्या मिंज एवं डॉ. मर्सी जॉर्ज द्वारा निभाया गया। मंच व्यवस्था डॉ. मीना मान, डॉ. श्रीराम कुंजाम एवं डॉ. ज्योति धारकर द्वारा की गई। डॉ. राजश्री नायडू द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई, जबकि अतिथियों का परिचय डॉ. एलिजाबेथ भगत एवं डॉ. उषा साहू द्वारा दिया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. ज्योति धारकर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस कार्यशाला में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जगजीत कौर सलूजा, डॉ. ए. के. खान, डॉ. अभिनेष सुराना, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. जी.एस. ठाकुर, डॉ. के. पद्मावती सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। लगभग 100 से अधिक विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला में सहभागिता कर लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम की सफलता में डॉ. निगार अहमद, डॉ. सीमा पंजवानी, डॉ. रीना ताम्रकार, डॉ. कुन्दन कुमार यादव, डॉ. दूंमन लाल सहित विशाखा समिति एवं समान अवसर प्रकोष्ठ के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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