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नंदनी के लिए मूर्तिकला बनी आमदनी की जरिया
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 11 मार्च 2026,  11:21 AM IST
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नंदनी के लिए मूर्तिकला बनी आमदनी की जरिया

दुर्ग/ जिले के विकासखण्ड दुर्ग अंतर्गत ग्राम थनौद निवासी नंदनी कुंभकार के लिए मूर्तिकला आमदनी की जरिया बनी है। उन्‍होंने जय कुंभकार स्व-सहायता समूह से जुड़ कर परिवार की मॉली हॉलत सुधारने में कामयाबी हासिल की है। नंदनी ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले हमें कुंभकारी के कार्याें के लिए बड़े ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था जिसके कारण हम मूर्ति निर्माण के कार्याें को बड़े पैमाने पर नहीं कर पाते थे और छोटे स्तर पर कार्य करके कम आमदनी होती थी। जिसे परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में कठनाईयों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़े सी.आर.पी के माध्यम से स्व-सहायता समूह के संबंध मे जानकारी प्राप्त हुई फिर हमने यह निर्णय लिया कि हम भी समूह बनायेंगे और फिर हमने समूह का निर्माण किया और सर्वप्रथम छोटी-छोटी बचत कर आपसी लेन-देन करने कि प्रक्रिया प्रारंभ किया। जिसके पश्चात हमें चक्रिय निधि 15000 रूपए प्राप्त हुई, जिसके बाद समूह 60 हजार रूपए आजीविका कार्य हेतु ऋण प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2024-2025 और 2025-2026 में कुल 1 लाख 50 हजार रूपए का ऋण लिया गया था, जिसमें से मूर्ति निर्माण करके एक लाख रूपए का ब्याज चुकता कर दिया गया है। आज समूह के माध्यम से हमें बहुत ही कम ब्याज दर पर ऋण आसानी से मिल जा रहा है, जिससे हमारी आजीविका को चलाने में कोई परेशानी नहीं आ रहीं।

बिहान के माध्यम से हमें मार्केटिंग के संबंध में भी काफी सहयोग देकर अपनी आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हूं। अप्रैल माह से लेकर दिसम्बर माह तक मूर्ति निर्माण, दीया, घरेलु और विवाह से संबंधित मिट्टी की वस्तुएं बच्चों के खिलौने बनाती हूं और दिसम्बर से मार्च आर्डर अनुसार सीमेंट की मुर्तियां भी बनाती हूं। गणेश पूजन, नवरात्री एवं दीपावली के समय हमारे समूह को बिहान के सहयोग से बाजार लगाने का मौका मिलता है, जिसमें छोटी मूर्तियां, दीया इत्यादि की बिक्री की जाती है और बाजार से हमें 9-10 लाख रूपए की बिक्री हो जाती हैं। जिसमें से 05 लाख रूपए तक शुद्ध आय प्राप्त होती है। प्राप्त आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। बच्चों की शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल का प्रबंध हुआ है। पक्के मकान एवं आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था हुई है। आज नंदनी मूर्तिकला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर लखपति दीदी बनने का सपना साकार करने जा रही है।

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