जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटती है, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं करती, तो यह एक बड़ा अपराध है। बाद में उस राशि को जमा कर देने से यह अपराध खत्म नहीं हो जाता। इस मामले में भोपाल की एक सिक्योरिटी कंपनी के मालिक ने हाईकोर्ट में 34 याचिकाएं दायर की थीं।
नियोक्ता का तर्क खारिज
उसका तर्क था कि उसने लगभग 1.76 करोड़ रुपए की बकाया पीएफ राशि जमा कर दी है, इसलिए उसके खिलाफ निचली अदालत में चल रहे केस को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर केवल बाद में पैसा जमा करने के आधार पर केस खत्म कर दिए जाएं, तो इससे गलत संदेश जाएगा।
यह प्रथम दृष्टया अपराध
हाईकोर्ट ने कहा कंपनियां जानबूझकर कर्मचारियों का पैसा रोकेंगी और जब मामला अदालत में पहुंचेगा, तब पैसा जमा कर बचने की कोशिश करेंगी। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा और कानून के उद्देश्य को कमजोर करेगा। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, क्योंकि कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटी, लेकिन उसे संबंधित खाते में जमा नहीं कराया।
यह भरोसे का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने कहा यह कर्मचारियों के विश्वास का उल्लंघन है और यह कानूनी रूप से दंडनीय भी है। इस फैसले का सीधा संदेश यह है कि नियोक्ताओं को कर्मचारियों के हितों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही या धोखाधड़ी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीएफ जैसी राशि कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए होती है, इसलिए इसे समय पर जमा करना अनिवार्य है।
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