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लड़खड़ाई भारतीय मुद्रा: डॉलर के मुकाबले पहली बार 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 20 मार्च 2026,  03:46 PM IST
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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।

मुंबई। भारतीय मुद्रा रुपया पहली बार 0.65% गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.24 पर जा पहुंचा है। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। इससे पहले रुपए डॉलर के मुकाबले 92.63 के स्तर तक गिरा था। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद से रुपया करीब 2% तक कमजोर हो चुका है।

तेल की कीमतों ने भी दिया योगदान
तेल की कीमतों में तेजी इस गिरावट की एक बड़ी वजह बनी है। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि शुक्रवार को इनमें कुछ गिरावट देखी गई। यूरोप के कई देश और जापान अब होरमुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की बात कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ने तेल आपूर्ति बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

दबाव घटने की संभावना फिलहाल कम
रुपए पर दबाव कम होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट अवधि में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 रुपए के स्तर तक गिर सकता है। मार्च में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है, जो जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है। इस निकासी ने भी रुपये को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है।

इकोनॉमी पर दिखेगा इसका असर
ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर डाल सकती हैं और महंगाई को बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में रखना, ऊंची महंगाई के अनुमान और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव संकेत देते हैं कि ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।

नोमुरा ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान
वहीं, नोमुरा की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का मानना है कि महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक वृद्धि दर करीब 7% रहने की संभावना है। उनके अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई में लगभग 0.5% की वृद्धि हो सकती है। अब वित्त वर्ष 27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.5% कर दिया गया है, जो पहले 3.8% था।

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