
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा भारत के महान शिक्षाविद, राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में भव्य छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय थे। विशिष्ट अतिथियों में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य चंदन कुमार चौबे, भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक, दुर्ग महापौर अल्का बाघमार, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर, एनएसएस स्वयंसेवकों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का व्यक्तित्व राष्ट्रवाद, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणास्रोत है तथा युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
मुख्य अतिथि पवन साय ने अपने संबोधन में डॉ. मुखर्जी के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति रहे और उनका प्रसिद्ध उद्घोष— "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे"—आज भी राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की अखंडता, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय एकता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका त्याग, दूरदर्शी नेतृत्व और 'राष्ट्र प्रथम' का विचार आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
आचार्य चंदन कुमार चौबे ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है और उनकी 125वीं जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाना उनके विचारों की आज भी प्रासंगिकता को दर्शाता है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारधारा को सशक्त संगठनात्मक आधार प्रदान किया, जिसका प्रभाव आज भी देश के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में स्पष्ट दिखाई देता है।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. ज्योति धारकर ने किया। अंत में प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक, एनसीसी एवं एनएसएस के स्वयंसेवक तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रभक्ति, युवा जागरण और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
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