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दुर्ग में चातुर्मास के दौरान संतों के प्रवचन, सत्य और गुरु महिमा का दिया संदेश
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 30 जुलाई 2026,  09:47 PM IST
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दुर्ग में चातुर्मास के दौरान संतों के प्रवचन, सत्य और गुरु महिमा का दिया संदेश

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दुर्ग। चातुर्मास के पावन अवसर पर दुर्ग शहर में विभिन्न जैन समाजों के धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता हो रही है। राष्ट्र संत मानव मिलन संस्थापक डॉ. मणिभद्र मुनि ने जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रद्धा, सत्य और सम्यक् दर्शन पर विस्तृत प्रकाश डाला। वहीं साधुमार्गी जैन संघ के समता भवन में श्री मनीष मुनि एवं श्री प्रणत मुनि के सानिध्य में चातुर्मास का शुभारंभ हुआ, जहां गुरु महिमा और तपस्या का महत्व बताया गया।
डॉ. मणिभद्र मुनि ने कहा कि श्रद्धा का वास्तविक अर्थ वह भावदशा है, जो सत्य से उत्पन्न होती है। सत्य के गर्भ से जन्मी श्रद्धा अटल और अटूट होती है, जिसे कोई भी विचलित नहीं कर सकता। भगवान महावीर ने ऐसी श्रद्धा को सम्यक् श्रद्धा कहा है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धा केवल मान्यता या अंधविश्वास से जन्म लेती है, वह मिथ्या श्रद्धा है। उन्होंने लोगों से श्रद्धा की चिंता छोड़कर सत्य के अनुसंधान का आह्वान करते हुए कहा कि भय से उत्पन्न श्रद्धा भी स्थायी नहीं होती। नरक और दुख का भय भी कई लोगों को श्रद्धालु बना देता है, लेकिन वास्तविक श्रद्धा सत्य के अनुभव से ही जन्म लेती है।
धर्मसभा में नवकार महामंत्र जप अनुष्ठान का शुभारंभ भी हुआ। प्रथम दिवस के जप का लाभ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक श्रमण संघ के अध्यक्ष धर्मचंद लोढ़ा एवं उनके परिवार ने लिया। तपस्वियों की तपस्या का पारणा जय आनंद मधुकर रतन भवन की भोजनशाला में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुनिश्री के दर्शन एवं वंदन के लिए दुर्ग पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन टीकम छाजेड़ ने किया।
इधर, साधुमार्गी जैन संघ दुर्ग के समता भवन में श्री मनीष मुनि एवं श्री प्रणत मुनि के सानिध्य में चातुर्मास का शुभारंभ हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि गुरु के उपकारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। गुरु ही कंकर को शंकर और आत्मा को परमात्मा बनने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूर्णिमा का चंद्रमा पूरे आकाश को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार सद्गुरु का ज्ञान जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
चातुर्मास के दौरान त्याग और तपस्या का क्रम भी प्रारंभ हो गया है। मीठालाल संचेती, गौरव पारख, चंचल सांखला तथा वीणा श्रीश्रीमाल ने तपस्या आरंभ की है। इस वर्ष साधुमार्गी संघ को चतुर्विध संघ का सानिध्य प्राप्त होने से समाज में उत्साह का वातावरण है। संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सांखला एवं मंत्री गौतम पारख ने सभी समाजजनों से धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप बोथरा ने किया।


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