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ज्ञान और भक्ति के रंग में रंगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनमोहक नृत्य-नाटिका ने बांधा समां, कृष्ण जन्म के दिव्य दृश्य ने किया भावविभोर
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 4 सितम्बर 2026,  02:04 PM IST
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ज्ञान और भक्ति के रंग में रंगा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनमोहक नृत्य-नाटिका ने बांधा समां, कृष्ण जन्म के दिव्य दृश्य ने किया भावविभोर

दुर्ग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित ‘आनंद सरोवर’ एवं राजऋषि भवन, केलाबाड़ी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, उमंग और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के सुंदर संगम से पूरा वातावरण श्रीकृष्ण की प्रेम, पवित्रता और दिव्यता के रंग में रंग गया।

इस अवसर पर कुमारी सानवी, मीठी, किया, चंद्राणी, मौसमी एवं जागृति ने श्रीकृष्ण के चरित्र एवं जीवन प्रसंगों पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। बाल कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति, आकर्षक नृत्य एवं सुंदर भाव-भंगिमाओं ने उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सभी श्रद्धालु स्वयं श्रीकृष्ण के जन्म के उस दिव्य क्षण के साक्षी बन गए हों।

 *श्रीकृष्ण पवित्रता, प्रेम और दिव्य गुणों के प्रतीक : रीटा दीदी* 

ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की संचालिका ब्रह्माकुमारी रीटा दीदी ने नन्हें कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण केवल भक्ति के पात्र ही नहीं, बल्कि पवित्रता, प्रेम, आनंद और दिव्य गुणों के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें अपने जीवन को भी श्रेष्ठ संस्कारों और सद्गुणों से सजाने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि भारत को त्योहारों की भूमि कहा जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और शिव जयंती दोनों का ‘रात्रि’ से गहरा आध्यात्मिक संबंध है। जन्माष्टमी की आधी रात और महाशिवरात्रि का भाव केवल 24 घंटे वाली रात नहीं, बल्कि अज्ञानता और अधर्म के अंधकार का प्रतीक है। जब संसार में अज्ञानता का घोर अंधकार छा जाता है, तब निराकार परमपिता परमात्मा शिव ज्ञान का प्रकाश देने के लिए अवतरित होते हैं। इसीलिए कहा गया है— “ज्ञान सूर्य प्रकटा, अज्ञान अंधेर विनाश।”

रीटा दीदी ने श्रीकृष्ण जन्म की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म उस समय का प्रतीक है, जब मनुष्य आत्माएं अज्ञानता और अनेक बंधनों में जकड़ी हुई हैं। जन्माष्टमी का संदेश हमें याद दिलाता है कि अब संसार परिवर्तन का समय है। जिस प्रकार वासुदेव श्रीकृष्ण को यमुना पार कर गोकुल ले गए, उसी प्रकार परमात्मा हमें भी कलियुग के अंधकारमय किनारे से सतयुगी स्वर्णिम दुनिया की ओर ले जाने का मार्ग दिखा रहे हैं। इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का सतयुग से अत्यंत सुंदर आध्यात्मिक संबंध है।

 *संसार में रहते हुए श्रेष्ठ कर्मों से बनें उदाहरणमूर्त : रूपाली दीदी* 

वरिष्ठ राजयोगी शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हम सभी को समभाव, पवित्रता, प्रेम और श्रेष्ठ कर्मों की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण ने संसार को छोड़कर जाने का संदेश नहीं दिया, बल्कि संसार में रहते हुए अपने श्रेष्ठ कर्मों के द्वारा सबके सम्मुख उदाहरणमूर्त बनने की प्रेरणा दी। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, हमें अपने श्रेष्ठ कर्म, दिव्य गुण और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखते हुए समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनना है।

उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रतीकों की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण को मक्खन प्रिय है और मक्खन हल्का होता है। इसका भावार्थ है कि हमें भी जीवन में सदा हल्के और निश्चिंत रहना है। परिस्थितियों का बोझ अपने मन पर नहीं रखना, बल्कि परमात्मा पर विश्वास रखते हुए प्रसन्नचित्त रहना ही जीवन को सहज बनाता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की रासलीला भी हमें सुंदर आध्यात्मिक संदेश देती है। रास का अर्थ केवल नृत्य नहीं, बल्कि सभी के साथ संस्कारों का सुंदर मिलन करते हुए प्रेम, सहयोग और सामंजस्य से आगे बढ़ना है। जीवन में हर व्यक्ति के साथ एडजस्ट होकर चलना, सबके गुणों को देखना और संबंधों में मधुरता बनाए रखना ही सच्ची रास है।

इसी प्रकार श्रीकृष्ण को शेषनाग पर नृत्य करते हुए भी दर्शाया गया है। इसका भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि नृत्य उल्लास का प्रतीक है। व्यक्ति तभी नृत्य करता है जब वह भीतर से प्रसन्न और उमंग में होता है। शेषनाग पर श्रीकृष्ण का नृत्य वास्तव में अपने मन के विकारों पर विजय प्राप्त करने और उन्हें अपने नियंत्रण में रखने का प्रतीक है। जब मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि विकारों पर विजय प्राप्त कर लेता है, तब उसके जीवन में सच्चा आनंद और उल्लास प्रकट होता है।

कार्यक्रम के अंत में नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा में हताहत हुई आत्माओं के प्रति ब्रह्माकुमारी बहनों एवं सभी भाई-बहनों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। सभी ने परमात्मा से प्रार्थना कर शांति के प्रकम्पन्न उन दिवंगत आत्माओं को अर्पित किए तथा पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की।


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