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हुनर को मिला बिहान का साथ, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ीं रानू कैवर्त
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 सितम्बर 2026,  09:25 PM IST
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हुनर को मिला बिहान का साथ, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ीं रानू कैवर्त

सिलाई, किराना दुकान से लेकर बटेर-मुर्गी पालन और हैचरी तक आजीविका की कई गतिविधियां

सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय, ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर बढ़े कदमImage after paragraph

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को स्थायी आजीविका का माध्यम बना रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की श्रीमती रानू कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने मेहनत, हुनर और बिहान से मिले सहयोग के बूते आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली रानू कैवर्त आज अपने गांव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने समूह से मिले मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग का बेहतर उपयोग करते हुए आजीविका की अनेक गतिविधियों को अपनाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि अब विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

*एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आमदनी*

रानू कैवर्त ने आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कई गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों ने परिवार के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए हैं।

सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान से जहां उन्हें अपने हुनर को आय में बदलने का अवसर मिला, वहीं किराना दुकान तथा पशु-पक्षी पालन से आमदनी के अतिरिक्त साधन तैयार हुए। हैचरी और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों ने उनके व्यवसाय को और विस्तार दिया। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर रानू ने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया है।

*बिहान से मिला अवसर, मेहनत ने बदली तस्वीर*

रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। बिहान से प्राप्त आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समूह की सामूहिक शक्ति ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने इस सहयोग को अपनी मेहनत और लगन से जोड़ा और धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए।

उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। रानू का प्रयास अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने हुनर को आजीविका में बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है।

*महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त संबल*

रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। नियमित आर्थिक सहयोग से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे उनके आर्थिक आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है और वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार*

रानू कैवर्त ने अपनी सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान से मिले सहयोग ने उनके जैसे ग्रामीण परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां सरकारी योजनाओं का सहयोग, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और महिलाओं की मेहनत एवं उद्यमशीलता मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते रानू के कदम यह संदेश देते हैं कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं।


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