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अब समंस की राह डिजिटल: दुर्ग जिला न्यायालय में ई-समंस प्रणाली पर कोर्ट मोहर्रिरों का प्रशिक्षण
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 6 अक्टूबर 2026,  07:07 PM IST
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अब समंस की राह डिजिटल: दुर्ग जिला न्यायालय में ई-समंस प्रणाली पर कोर्ट मोहर्रिरों का प्रशिक्षण

कागज से क्लिक तक न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय की नई पहल

दुर्ग,  / न्याय व्यवस्था में तकनीक अब केवल भविष्य की बात नहीं रही—वह आज की न्यायिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बन रही है। इसी बदलाव को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए न्यायालय के समस्त कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली का प्रशिक्षण प्रदान किया।

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग श्री के. विनोद कुजूर के मुख्य मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्पष्ट था समंस की पारंपरिक प्रक्रिया को तकनीक की गति से जोड़ना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक स्मार्ट, तेज एवं ट्रैक करने योग्य बनाना।

श्री प्रशांत पाराशर, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के मार्गदर्शन में श्री रवि कुमार महोबिया, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, दुर्ग द्वारा ई-समंस प्रणाली पर विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कोर्ट मोहर्रिरों को प्रणाली के विभिन्न चरणों और न्यायालयीन कार्य में इसके प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।

*समंस अब सिर्फ कागज नहीं, डिजिटल ट्रैकिंग का हिस्सा*

प्रशिक्षण के दौरान कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली के व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराया गया। इसमें ई-समंस तैयार करना, संबंधित पक्षकार अथवा गवाह को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रेषित करना, उसकी डिलीवरी की स्थिति देखना तथा प्राप्त डिजिटल डिलीवरी रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का सुरक्षित संधारण शामिल रहा। यानी, समंस भेजने से लेकर उसकी डिलीवरी तक की प्रक्रिया अब अधिक व्यवस्थित और डिजिटल रूप से ट्रैक की जा सकेगी।

ई-समंस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी गति और पारदर्शिता है। पारंपरिक प्रक्रिया में जहां समंस की सेवा और उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त करने में समय लग सकता है, वहीं डिजिटल माध्यम प्रक्रिया को अधिक त्वरित और ट्रैक करने योग्य बनाने में मदद करता है। इससे न्यायालयीन कार्यप्रणाली में समय की बचत, प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्य की दक्षता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

*Training नहीं, Digital Transition*

यह प्रशिक्षण केवल किसी नई प्रणाली को चलाना सीखने तक सीमित नहीं रहा। कोर्ट मोहर्रिरों को प्रणाली का व्यावहारिक प्रदर्शन (hands-on demonstration) कराया गया, ताकि वे वास्तविक न्यायालयीन कार्य में ई-समंस का प्रभावी और सुचारु उपयोग कर सकें।

यह पहल इस बात का संकेत है कि न्यायालयीन व्यवस्था भी बदलती तकनीक के साथ कदम मिला रही है जहां फाइलों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड, प्रक्रिया के साथ real-time tracking और पारंपरिक व्यवस्था के साथ technology-enabled justice आगे बढ़ रही है।

दुर्ग जिला न्यायालय की यह पहल न्याय व्यवस्था में हो रहे उस बदलाव की कहानी है, जहां तकनीक का उद्देश्य केवल व्यवस्था को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंचने वाली प्रक्रिया को सरल, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाना है।


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