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संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में मोदी सरकार; परिसीमन और महिला आरक्षण बिल लाने की योजना
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 16 अक्टूबर 2026,  07:45 PM IST
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केंद्र की मोदी सरकार इसी महीने अक्टूबर के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। इस सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े अहम संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। लोकसभा में संख्या बल को लेकर सरकार पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है।

संसद के गलियारों में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार इसी माह के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाकर लंबित संवैधानिक सुधारों को आगे बढ़ाने का खाका तैयार कर रही है। इस सत्र का मुख्य फोकस लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने तथा परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने पर होगा। राजनीतिक हलकों में यह कदम रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

सत्रावसान न होने से विशेष बैठक बुलाने की राह आसान
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित जरूर हुआ था, लेकिन दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान (Prorogation) अभी तक नहीं किया गया है। संवैधानिक नियमों के तहत सत्रावसान न होने के कारण सरकार को नया सत्र बुलाए बिना उसी सत्र की विशेष बैठकें आयोजित करने का सीधा अधिकार प्राप्त है। संसदीय कार्य मंत्रालय फिलहाल तारीखों और विधायी कामकाज की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटा है।

अप्रैल में गिरे विधेयक को दोबारा पास कराने का लक्ष्य
इससे पहले इसी वर्ष बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी समर्थन न मिल पाने के कारण गिर गया था। सरकार अब किसी भी जोखिम से बचने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में सरकार के पास निचले सदन में विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और वह इस बार इसे हर हाल में कानूनी जामा पहनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

डीएमके और अन्य छोटे दलों से समर्थन की जुगत
संख्या बल को और मजबूत करने के लिए सरकार ने तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके से संपर्क साधा है। तमिलनाडु चुनावों के बाद डीएमके के कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन से अलग होने के बाद नए सियासी समीकरण बने हैं, जिसका लाभ उठाने की कोशिश में सरकार जुटी है। इसके अलावा कुछ अन्य निर्दलीय और छोटे क्षेत्रीय दलों से भी फ्लोर मैनेजमेंट के तहत बातचीत की जा रही है ताकि मतदान के दौरान दो-तिहाई बहुमत आसानी से सुनिश्चित हो सके।

ब्रिक्स संसदीय मंच और विपक्ष के विरोध के बीच सत्र की तैयारी
विशेष सत्र की संभावित तारीखें तय करते समय 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम का भी ध्यान रखा जा रहा है। संभावना है कि बैठक बुलाने से पूर्व सांसदों को करीब एक हफ्ते का आधिकारिक नोटिस दिया जाएगा। यह पूरी कवायद ऐसे समय हो रही है जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मसले पर सरकार की घेराबंदी करने में जुटा हुआ है।


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