• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
सरगुजा और भी
आम जनता पर शराबखोरी के लिए कार्रवाई, वर्दी में नशे में धुत मिले पुलिसकर्मी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 19 अक्टूबर 2026,  09:17 AM IST
  • 522
आम जनता पर शराबखोरी के लिए कार्रवाई, वर्दी में नशे में धुत मिले पुलिसकर्मी दुर्ग पुलिस के जागरूकता अभियान पर उठे सवाल, अम्बिकापुर की घटना के बाद दो पुलिसकर्मी निलंबित

ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज | दुर्ग /9993590905

दुर्ग पुलिस आम नागरिकों को शराब पीकर सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग करने और नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का डर दिखा रही है। गली-मोहल्लों में शराबखोरी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी नशे के दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता का संदेश दे रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, दुर्ग पुलिस के ही दो कर्मचारियों के वर्दी में कथित तौर पर शराब सेवन कर जमीन पर सोते पाए जाने की घटना ने विभाग के अनुशासन और जागरूकता अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वर्दी में शराब सेवन, इंसास रायफल छोड़कर सोने का आरोप

पुलिस अधीक्षक कार्यालय, दुर्ग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सहायक उपनिरीक्षक जीवन प्रकाश एक्का और आरक्षक क्रमांक 1223 ऋषिकांत त्रिपाठी को 17 अक्टूबर 2026 को मुलजिम पेशी ड्यूटी के लिए जिला सरगुजा भेजा गया था। आदेश में उल्लेख है कि 18 अक्टूबर को शाम 5:40 बजे अम्बिकापुर के नए बस स्टैंड पर दोनों पुलिसकर्मी पुलिस की वर्दी में शराब का सेवन करते हुए तथा इंसास रायफल छोड़कर जमीन पर सोते पाए गए।

मामले को गंभीर मानते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र, दुर्ग में संबद्ध कर दिया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी आदेश में उल्लेख है।

आम जनता के लिए सख्ती, विभाग के भीतर अनुशासन का सवाल

सवाल यह है कि जब पुलिस आम नागरिकों को कानून और अनुशासन का पालन करने की नसीहत देती है, तो पुलिसकर्मियों से अपेक्षित आचरण की जवाबदेही कितनी सख्ती से तय होती है? वर्दी में ड्यूटी के दौरान शराब सेवन और सरकारी हथियार को असुरक्षित स्थिति में छोड़ने का आरोप केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।

पुलिस की जिम्मेदारी कानून लागू करने के साथ-साथ स्वयं कानून और विभागीय नियमों का पालन करने की भी है। ऐसे मामलों में केवल निलंबन ही पर्याप्त है या विभागीय जांच के बाद अन्य कार्रवाई भी होगी, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

किन नियमों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

पुलिसकर्मियों के आचरण पर लागू सेवा नियमों के तहत मामले की जांच की जा सकती है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत लागू अनुशासनात्मक प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई का परीक्षण किया जा सकता है। संबंधित नियमों की सटीक प्रयोज्यता और संभावित दंड सक्षम प्राधिकारी द्वारा तथ्यों एवं जांच के आधार पर तय किए जाएंगे।

यदि जांच में सरकारी हथियार को लापरवाही से छोड़ने या ड्यूटी के दौरान गंभीर कदाचार की पुष्टि होती है, तो विभागीय स्तर पर अतिरिक्त कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

जागरूकता अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल

दुर्ग पुलिस का नशामुक्ति और शराबखोरी के खिलाफ अभियान तभी प्रभावी दिखाई देगा, जब विभाग अपने कर्मचारियों के आचरण के मामले में भी समान रूप से सख्ती और पारदर्शिता दिखाएगा। आम नागरिकों पर कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के लिए जवाबदेही—दोनों में कानूनसम्मत समान मानक ही पुलिस की विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं।

अब निगाहें विभागीय जांच पर हैं: क्या दोनों निलंबित पुलिसकर्मियों के मामले में विस्तृत जांच कर हथियार सुरक्षा और ड्यूटी संबंधी जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की जाएगी? इसका जवाब जांच और विभाग की आगे की कार्रवाई से सामने आएगा। 


Add Comment


Add Comment






ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter