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मजदूरों को काम, गांवों को विकास की सौगात
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 22 अक्टूबर 2026,  07:52 PM IST
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मजदूरों को काम, गांवों को विकास की सौगात

जी-राम-जी से ₹50 करोड़ से ज्यादा मजदूरी बंटी, 1,076 निर्माण कार्यों को मंजूरी
दुर्ग।
गांवों में रोजगार के साथ विकास की रफ्तार भी तेज हो रही है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी जी-राम-जी के तहत दुर्ग जिले में श्रमिकों को रोजगार देने के साथ गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत अब तक ₹5,011.25 लाख यानी करीब ₹50.11 करोड़ की मजदूरी का भुगतान किया जा चुका है। वहीं, जिले में 1,076 निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है।
-तीनों जनपदों में 10,469 श्रमिकों को काम
जिले के दुर्ग, धमधा और पाटन जनपद पंचायतों में वर्तमान में कुल 10,469 श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें धमधा में 5,145, दुर्ग में 3,822 और पाटन में 1,502 श्रमिक शामिल हैं। योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है। ग्रामीण ग्राम पंचायत के माध्यम से काम की मांग कर सकते हैं। मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
-SNA से सीधे खातों में पहुंच रही मजदूरी
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मजदूरी भुगतान को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल नोडल अकाउंट (SNA) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) द्वारा राशि श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में भेजी जा रही है। स्वीकृत कार्यों और भुगतान की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि श्रमिकों को समय पर मजदूरी का लाभ मिल सके।
जनपदवार भुगतान में पाटन में ₹1,808.00 लाख, दुर्ग में ₹1,634.99 लाख और धमधा में ₹1,475.40 लाख की मजदूरी का भुगतान किया गया है।
-तालाब-डबरी से स्कूल तक होंगे निर्माण
योजना के तहत कुल 1,076 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें धमधा जनपद में 412, पाटन में 315 और दुर्ग में 349 कार्य शामिल हैं। तालाब, डबरी, जल निकासी, कच्ची नाली, ट्रेंच, भूजल संवर्धन और तालाब गहरीकरण जैसे कार्यों से जल संरक्षण और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, मुक्तिधाम शेड, आंगनबाड़ी और बालिका शौचालय निर्माण से ग्रामीण आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी। इन कार्यों से श्रमिकों को रोजगार मिलने के साथ गांवों को लंबे समय तक उपयोगी परिसंपत्तियां भी मिलेंगी।


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