देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और भारतीय चुनाव आयोग की स्वायत्तता बेहद संवेदनशील विषय रहे हैं। हाल के समय में SIR की पारदर्शिता और वर्ष 2023 में लागू हुए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को लेकर राजनीतिक दलों और आयोग के बीच टकराव गहराता जा रहा है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग के निर्णय प्रक्रिया में मनमानी हो रही है और मतदाता सूची के संशोधन से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का दावा है कि सभी कदम पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी हैं। इसी सियासी और कानूनी रस्साकशी के बीच सुप्रीम कोर्ट में तीन दर्जन अर्जियों के जरिए आयोग की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया गया है, जिस पर देश की शीर्ष अदालत में विस्तृत सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है।
दिवाली की छुट्टियों के बाद होगी विस्तृत सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने चुनाव आयोग के कामकाज, मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों और अलग-अलग राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद अगली तारीख तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब इस संवेदनशील और बड़े मामले पर अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद की जाएगी। इसके साथ ही पीठ ने प्रक्रियात्मक कदमों को पूरा करने के लिए दोनों पक्षों को समय सीमा तय कर दी है।
जवाबी हलफनामे के लिए अदालत ने दिया 10 दिन का समय
अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे चुनाव आयोग द्वारा पूर्व में दाखिल किए गए संयुक्त हलफनामे पर अपना जवाब 10 दिनों के भीतर पेश करें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी यह विकल्प दिया है कि यदि वह चाहे तो इसी 10 दिन की समयावधि के भीतर अपना अतिरिक्त हलफनामा भी रिकॉर्ड पर रख सकता है, ताकि दिवाली बाद होने वाली सुनवाई में सभी कानूनी दस्तावेज पूरे रहें।
टीएमसी सांसद डोला सेन की नई याचिका भी मूल मामले से जुड़ी
इस मामले की सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता डोला सेन की ओर से दायर नई याचिका पर भी अदालत का ध्यान गया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे पहले से लंबित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया है।
इन याचिकाओं में मुख्य रूप से यह गुहार लगाई गई है कि जब तक शीर्ष अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक अलग-अलग राज्यों में चल रही मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की कवायद पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज कर दी सफाई
दूसरी ओर, भारतीय चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत में संयुक्त हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। आयोग का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और अन्य चुनावी प्रबंधन से जुड़े तमाम निर्णय पूरी तरह विधिसम्मत हैं और ये फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति और आपसी सहमति से लिए गए थे, लिहाजा आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाना गलत है
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