• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
धर्म और भी
तीर्थपति श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु के प्रतिष्ठाकर्त्ता निरंजनभाई चौकसी मुम्बई से सपरिवार पधारें...
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 6 जनवरी 2025,  09:46 AM IST
  • 275

तीर्थपति का पक्षाल एवं अष्टप्रकारी पूजा कर  हुए आनंद विभोर...
-श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
दुर्ग/ नगपुरा। 
श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में मंगलवार को तीर्थपति श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु के प्रतिष्ठाकर्त्ता (प्रतिष्ठा लाभार्थी) निरंजनभाई चौकसी मुम्बई सपरिवार पधारें। उल्लेखनीय है कि तीर्थ प्रतिष्ठाचार्य गच्छाधिपति  प पू आचार्य भगवंत श्रीमद्‌ विजय राजयश सूरीश्वरजी म० सा० की प्रेरणा से तीर्थोध्दार के के प्रारम्भिक पड़ाव में निरंजन भाई चौकसी को मूलनायक भगवान प्रतिष्ठा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

Image after paragraph

तीर्थोध्दार  जीर्णोद्धार क्रम में दिनांक 5 फरवरी 1995 माघ सुद षष्ठमी सं० 2051 को आप ने सूरत विशा ज्ञाति के हजारों श्रावकों की समृद्ध उपस्थिति में दादा श्री उवसग्गहरं  पार्श्वनाथ प्रभु का प्रतिष्ठा किए। आप की श्राविका साधनाबेन चौकसी की तीव्रतम इच्छा को स्वीकार कर वर्षों बाद आज तीर्थ दर्शनार्थ पहुंचे। आज प्रातः 108 वासक्षेप पूजन के साथ ही तीर्थपति का पक्षाल एवं अष्टप्रकारी पूजा कर आनंद विभोर हो गए।

Image after paragraph

उन्होंने परिसर में संचालित गौशाला, आरोग्यम् गुरुकूल की सेवाओं का अवलोकन किए । तीर्थ की व्यवस्थाओं से अभिभूत हुए। तीर्थ अध्यक्ष गजराज पगारिया, मैनेजिंग ट्रस्टी पुखराज दुगड़, ट्रस्टी भीखमचंद कोठारी, श्राविका प्रतिभा कोठारी,प्रिया गोलछा ने निरंजन भाई चौकसी एवं आशीषभाई सोनावाला का बहुमान कर तीर्थ की भावी योजनाओं से अवगत किए कराया।
मुमुक्षु अभिनंदन....
आज तीर्थ में मुमुक्षु आर्यन झवेरी, मुमुक्षु युतिबेन शाहनंद मुम्बई से तीर्थपति के दर्शन वंदन करने तीर्थ पधारें ,आप दोनो दीक्षार्थी प पू आचार्य युग भूषण सूरीश्वर जी म सा (पण्डित महाराज) के वरदहस्ते घाटकोपर मुम्बई में 7 फरवरी 2025 को प्रवज्या अंगीकार करेगें। तीर्थ प्रबंधन ने मुमुक्षुओं का अभिनंदन कर शुभकामना एवं बधाई अर्पित किया।

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

Add Comment


Add Comment

RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg
RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg





Get Newspresso, our morning newsletter