• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
रायपुर और भी
कला को सम्मान और कारीगरों की समृद्धि हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 2 जुलाई 2025,  07:49 AM IST
  • 464
कला को सम्मान और कारीगरों की समृद्धि हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री साय

रेशम और हस्तशिल्प को मिलेगा नया बाजार, ऑनलाइन बिक्री और निर्यात पर होगा फोकस
-ग्रामोद्योग में रोजगार की असीम संभावनाएं, मुख्यमंत्री ने दिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश
-मुख्यमंत्री ने की ग्रामोद्योग विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा
-मुख्यमंत्री का निर्देश– समय पर हो यूनिटी मॉल का निर्माण, गुणवत्तापूर्ण ब्रांडिंग पर फोकस
रायपुर। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि पारंपरिक रूप से बुनाई, कढ़ाई, हस्तशिल्प और माटी कला से जुड़े कारीगरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी इस कार्य में लगे लोगों की आजीविका को पुनर्जीवित करना और उनकी आय बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में ग्रामोद्योग विभाग के कार्यों और गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान राज्य में रेशम, हस्तशिल्प, खादी, हथकरघा और माटीकला से जुड़े पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों और उत्पादों को प्रोत्साहन देने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत शामिल सभी घटकों से जुड़ी आधारभूत जानकारी ली और कहा कि इन क्षेत्रों में रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और विपणन के लिए ठोस एवं समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि स्थायी रूप से रोजगार के अवसरों का सृजन हो सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रेशम उत्पादन, कोसा वस्त्र निर्माण और हथकरघा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की परंपरा और दक्षता को नई ऊंचाई देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में संचालित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के माध्यम से कुशल कारीगरों की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने संस्थान के सुचारु संचालन की दिशा में भी ठोस कदम उठाने की बात कही।

Image after paragraph

श्री साय ने कहा कि विभाग द्वारा प्रशिक्षण के लिए जो राशि आबंटित की जाती है, उसका पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि कारीगरों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके। 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पारंपरिक शिल्प और बुनाई से जुड़े अत्यंत कुशल कारीगर मौजूद हैं, जो पीढ़ियों से बेहद सुंदर और आकर्षक कलाकृतियां एवं उत्पाद तैयार करते आ रहे हैं। ये हस्तनिर्मित वस्तुएं लोगों को काफी पसंद आती हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि इन उत्पादों को राज्य और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री और निर्यात की संभावनाओं को सक्रिय रूप से तलाशने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की बात भी उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनिटी मॉल का निर्माण समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए, ताकि राज्य के उत्पादों को विशेष स्थान और ब्रांडिंग मिल सके तथा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं। इस क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार लाया जाए, ताकि रेशम उद्योग को मजबूती मिले और अधिक से अधिक लोगों को इससे रोजगार उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि हम अपने पारंपरिक कारीगरों और बुनकरों की कला को सम्मान देकर ही उनके जीवन को समृद्ध बना सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, सचिव ग्रामोद्योग श्री श्याम धावड़े, प्रबंध संचालक हस्तशिल्प एवं माटीकला बोर्ड  जे.पी. मौर्य सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

Add Comment


Add Comment

RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg
RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter