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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं: पोषण पुनर्वास केंद्र में 33 कुपोषित बच्चों का किया गया उपचार
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 2 जुलाई 2025,  08:42 AM IST
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बीजापुर जिले के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित एवं अंदरूनी क्षेत्र के पामेड़ में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) एक स्वास्थ्य सुविधा है। जहां गंभीर कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है और उनका इलाज किया जाता है।

जगदलपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित एवं अंदरूनी क्षेत्र के पामेड़ में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) एक स्वास्थ्य सुविधा है। जहां गंभीर कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है और उनका इलाज किया जाता है। इस केंद्र में 6 माह में 33 कुपोषित बच्चों का उपचार किया गया, जिसमें पामेड़ के 6, टेकलेर के 3, धरमारम के एक, तोंगगुड़ा के 7, मेदीगुड़ा के 4, रासपल्ली के एक, जारपल्ली के 6 एवं बोटतोंग के 5 कुपोषित रहे। बताया जा रहा है कि यह केंद्र, जिला खनिज निर्माण के तहत, माह दिसम्बर 2024 से 10 बेड संचालित किया गया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर स्थापित किए जाते हैं।

पामेड़ विकास खण्ड उसूर का अतिसंवेदनशील क्षेत्र होने के कारण कलेक्टर बीजापुर एवं जिला प्रशासन के अथक प्रयास से गंभीर बच्चों की स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुये केन्द्र की स्थापना की गई है। लाभान्वित जनसंख्या 10846, आश्रित ग्राम 30, उप स्वास्थ्य केन्द्र की संख्या 4 है सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एक है। गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा और पोषण संबंधी देखभाल प्रदान करना, बच्चों को निर्धारित प्रवेश मानदंडों के अनुसार भर्ती करना, यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को उचित और सुविधा आधारित केस प्रबंधन मिले। मृत्यु दर को कम करना, बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए माताओं को प्रशिक्षण देना। इस केन्द्र में बच्चों को 15 दिनों तक विशेष चिकित्सा सुविधा और खानपान के माध्यम से उपचार दिया जाता है। नि:शुल्क जांच, इलाज और खानपान प्रदान किया जाता है। माताओं को बच्चों की देखभाल करने और उन्हें सुपोषित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

एनआरसी में मिलने वाली सुविधाएं
विशेष चिकित्सा सुविधा, पोषण संबंधी पूरक, दवाएं और परामर्श, बच्चों को 15 दिन के अंदर कुपोषण से मुक्त करने का प्रयास किया जाता है और यदि आवश्यक हो, तो 21 दिन तक विशेष देखभाल की जाती है। भर्ती बच्चों को वजन में 15 फीसदी की वृद्धि के बाद ही छुट्टी दी जाती है, नि:शुल्क उपचार और जांच, डिस्चार्ज के बाद भी, बच्चों की नियमित जांच की जाती है और माता-पिता को सहायता प्रदान की जाती है।

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