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जेपी अस्पताल का CMHO ने किया औचक निरीक्षण:टोकन सिस्टम बंद, जलभराव और लैब शिफ्टिंग में देरी पर जताई नाराजगी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 23 जुलाई 2025,  09:09 PM IST
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जेपी अस्पताल का CMHO ने किया औचक निरीक्षण:टोकन सिस्टम बंद, जलभराव और लैब शिफ्टिंग में देरी पर जताई नाराजगी

भोपाल के जय प्रकाश जिला अस्पताल का बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में टोकन सिस्टम बंद मिला, दवा काउंटर पर लंबी कतारें लगी रहीं, छत पर जलभराव और इंटीग्रेटेड लैब की शिफ्टिंग में देरी पाई गई। इन अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए डॉ. शर्मा ने 7 दिन के भीतर सभी व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।

व्यवस्थित नहीं हो सका टोकन सिस्टम

जेपी अस्पताल में करीब दो वर्ष पहले टोकन सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन आज तक यह व्यवस्थित नहीं हो सका। प्रबंधन के अनुसार, यदि टोकन को अनिवार्य कर दिया जाए तो मरीजों को पहले टोकन और फिर पर्चा बनवाना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि टोकन की डिस्प्ले केवल पर्चा काउंटर पर है, जबकि हर डॉक्टर के कक्ष में यह होनी चाहिए ताकि मरीजों को सही जानकारी मिल सके।

इंटीग्रेटेड लैब की शिफ्टिंग के लिए निर्देश

CMHO ने निर्देश दिए कि अस्पताल की पुरानी लैब, जो वर्तमान में प्रथम तल पर संचालित हो रही है, उसे दूसरी मंजिल पर बनी नई इंटीग्रेटेड लैब में तत्काल शिफ्ट किया जाए। सभी उपकरण और स्टाफ स्थानांतरित होने के बाद पुरानी लैब के नवीनीकरण का कार्य एक महीने में पूरा करने को कहा गया है।

निरीक्षण के दौरान पैथोलॉजिस्ट डॉ. नीता जैन, सिविल इंजीनियर और लैब निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

सफाई और जलभराव पर भी नाराजगी

डॉ. शर्मा ने अस्पताल में पानी की टंकियों की नियमित सफाई, छत पर जलभराव और सीपेज की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सप्ताह में कम से कम एक दिन पानी की टंकियों की सफाई और छतों की जांच अनिवार्य रूप से की जाए।

एक ही स्थान पर सभी जांच सुविधाएं

अस्पताल परिसर में शुरू की जा रही इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब से मरीजों को कई जांचों के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी। अब टीबी, मलेरिया, एचआईवी जैसी जांचें एक ही स्थान पर होंगी।

इस लैब में हेमेटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, साइटोलॉजी, क्लिनिकल पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी सहित सभी प्रमुख विभाग एक साथ कार्यरत रहेंगे।

नई लैब की चार खास बातें

  • सभी प्रमुख जांचें एक स्थान पर: टीबी, मलेरिया, एचआईवी आदि की सुविधा एक ही छत के नीचे।
  • मल्टी-डिपार्टमेंट यूनिट: हेमेटोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, साइटोलॉजी जैसे विभाग एकीकृत।
  • एकीकृत टेक्नीशियन टीम: सभी सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लैब टेक्नीशियन एक जगह कार्यरत।
  • रिपोर्ट में तेजी और बेहतर समन्वय: मरीजों को कम समय में रिपोर्ट और समुचित सुविधा मिलेगी। CMHO डॉ. मनीष शर्मा ने कहा, 'जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। नई लैब से सभी जांचें एक ही स्थान पर सुलभ और सटीक रूप से होंगी। साथ ही वर्षा के मौसम में जलभराव और सीपेज जैसी समस्याओं से भी निपटना हमारी प्राथमिकता है।'

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