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मध्य प्रदेश और भी
मेडिकल स्टोर पर नहीं लगा सकेंगे डिस्काउंट बोर्ड
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 28 जुलाई 2025,  08:46 PM IST
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एमपीसीडीए (मध्यप्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन) ने इस फैसले को "ऐतिहासिक" बताया है।

भोपाल: मध्यप्रदेश में अब मेडिकल स्टोर्स पर 10% से 80% तक की छूट का लालच दिखाकर ग्राहकों को खींचना महंगा पड़ सकता है। मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने इस तरह के छूट वाले बोर्ड लगाने वाले मेडिकल स्टोर मालिकों और पंजीकृत फार्मासिस्टों को कड़ी चेतावनी दी है। अगर किसी स्टोर पर इस तरह के डिस्काउंट बोर्ड लगे मिले तो संबंधित फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द या निलंबित किया जा सकता है।

काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह प्रथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 का उल्लंघन है और इसे अनैतिक माना गया है। दवाइयों की बिक्री एक सेवा है, न कि मार्केटिंग का हथियार। कई मेडिकल स्टोर अपने बोर्ड और सोशल मीडिया के जरिए "70% छूट" जैसी बातें प्रचारित कर रहे हैं, जो अब बंद करना होगा।

15 दिन में हटाना होगा छूट का बोर्ड

सभी मेडिकल स्टोर्स को 15 दिन के भीतर ऐसे डिस्काउंट बोर्ड हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नहीं हटाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम का भी उल्लंघन

फार्मेसी काउंसिल ने कहा है कि यह प्रथा प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 4 का उल्लंघन है, क्योंकि यह छोटे दुकानदारों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाती है और बाजार में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है।

MP केमिस्ट एसोसिएशन और फार्मासिस्टों की प्रतिक्रिया

एमपीसीडीए (मध्यप्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन) ने इस फैसले को "ऐतिहासिक" बताया है। एसोसिएशन के अनुसार महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में पहले ही ऐसा निर्णय लागू हो चुका है।

भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि पिछले 5 सालों से वे इस नियम के लिए प्रयासरत थे। उनका मानना है कि भारी छूट की आड़ में कई बार नकली दवाओं की आपूर्ति भी होती रही है, जिससे मरीजों की जान को जोखिम होता है।

आम जनता को मिलेगा पारदर्शी लाभ

इस आदेश के बाद दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, जो सामान्य 5-10% की छूट पहले मिलती थी, वह मिलती रहेगी। सिर्फ "लुभावनी और भ्रामक छूट" पर रोक लगाई गई है, जिससे आम लोगों को ही फायदा होगा।

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