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दुर्ग निगम की सच्चाई उजागर, पूर्व सभापति की शह पर रसूखदार माली ने हड़पी निगम की जमीन, अवैध नल कनेक्शन से लाखों का नुकसान
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 5 अक्टूबर 2025,  08:56 AM IST
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दुर्ग निगम की सच्चाई उजागर : पूर्व सभापति की शह पर रसूखदार माली ने हड़पी निगम की जमीन, अवैध नल कनेक्शन से लाखों का नुकसान। अवैध नल कनेक्शन का खेल किसके इशारे पर

दुर्ग। दुर्ग नगर निगम का भ्रष्टाचार और राजनीतिक रसूख का खेल एक बार फिर जनता के सामने आ गया है। फिल्टर प्लांट के सामने हजारों स्क्वायर फीट निगम की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर माली द्वारा पौधों का कारोबार चलाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस कब्जे के पीछे सीधे-सीधे पूर्व सभापति दिनेश देवांगन और उनकी धर्मपत्नी लीना दिनेश देवांगन (जो वर्तमान में जल विभाग की प्रभारी हैं) का संरक्षण बताया जा रहा है।

अवैध कब्जा और निगम की “औपचारिक कार्रवाई”
बाजार विभाग के अधिकारी अभ्युदय मिश्रा ने स्वीकार किया कि माली ने 5000 स्क्वायर फीट से अधिक भूमि पर कब्जा कर ताला जड़ दिया था। दो बार चालान काटने और नोटिस देने के बाद भी कब्जा बरकरार है। जब कार्रवाई की मांग उठी तो पूर्व सभापति दिनेश देवांगन ने साफ कह दिया – “ये मेरे वार्ड का नागरिक है, दिवाली तक इसे यहां पौधे रखने दिए जाएं।”
यानी निगम का कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है, रसूखदारों के लिए नहीं।

किराए को लेकर विवाद, राजस्व ठप
पूर्व में यही जमीन अन्य लोगों को शुल्क लेकर अस्थायी तौर पर किराए पर दी जाती थी, मगर अब माली से न किराया वसूला जा रहा है और न ही निगम को कोई राजस्व मिल रहा है। इससे हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। निगम अधिकारी और पूर्व सभापति की आपसी खींचतान की वजह से पूरा मामला ठप पड़ा है।

अवैध नल कनेक्शन का खेल
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह खुलासा हुआ कि माली ने निगम के संरक्षित फिल्टर प्लांट से बिना अनुमति के अवैध नल कनेक्शन भी ले रखा है। सवाल उठ रहा है – आखिर किसके इशारे पर यह अवैध कनेक्शन दिया गया और अधिकारियों ने इसे रोकने की जगह छुपाया क्यों? क्या जल विभाग की प्रभारी होने के नाते पूर्व सभापति की पत्नी की भूमिका भी इसमें रही है ?

 

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जल विभाग के कार्यपालन अभियंता गिरीश दीवान ने कहा – “अवैध कनेक्शन की जानकारी मुझे आज ही मिली है। मौके का निरीक्षण कर विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

सवालों के घेरे में निगम
क्या निगम सिर्फ चालान काटकर रसूखदारों को बचाने का काम कर रहा है?

क्या पूर्व सभापति की सिफारिश कानून से ऊपर है?

लाखों रुपये के राजस्व का हिसाब कौन देगा?

अवैध नल कनेक्शन की अनुमति किसने दी?

 जनता का सीधा सवाल है – “दुर्ग नगर निगम किसके लिए काम कर रहा है, जनता के लिए या राजनीतिक रसूखदारों की जेब भरने के लिए ?”

 

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