विभाग पर लग रहा है खास कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ की 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा की निविदा प्रक्रिया में गंभीर भ्रष्टाचार और पक्षपात का मामला सामने आया है। पहली निविदा में सर्वाधिक 92 अंक पाने वाली संस्था CAMP को बाहर कर अब एक खास कंपनी को अनुबंध दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने तीन बार प्रक्रिया में हेराफेरी की। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, CGMSC अब तीसरी निविदा में केवल एक बोलीदाता (EMRI Green Health Services) की भागीदारी के बावजूद इसे अवार्ड करने की योजना बना रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। विभाग शुरू से ही यही चाहता था और पूरी प्रक्रिया को इसी उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
पहली निविदा (Ref. No.: S. No.194/CGMSCL/2025-26, 9 अप्रैल 2025) में 15 बोलीदाताओं ने प्री-बिड मीटिंग में हिस्सा लिया और RFP की शर्तों पर आपत्ति जताई, लेकिन CGMSC ने सभी को नजरअंदाज कर दिया। केवल 5 बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया। तकनीकी मूल्यांकन में 92 अंक पाने वाली CAMP प्रथम, EMRI Green 87 अंक के साथ द्वितीय और Jai Ambey 78 अंक के साथ तृतीय रही। QCBS प्रणाली (70% तकनीकी, 30% वित्तीय) के तहत CAMP को अनुबंध मिलना तय था। लेकिन वित्तीय बोलियां खोलने से पहले CGMSC ने “तकनीकी कारणों” का हवाला देकर निविदा रद्द कर दी। इसकी शिकायत भी विभाग में की गई किन्तु इसका कोई उत्तर नहीं दिया गया।
दूसरी निविदा (Ref. No.: S. No.194(R)/CGMSCL/2025-26, 11 जुलाई 2025) में CGMSC ने शर्तें इस तरह बदलीं कि खास कंपनी को सीधा फायदा पहुंचे। अनुभव: 5 वर्ष के लिए 5 अंक → 1 अंक/वर्ष (अधिकतम 10); टर्नओवर: ₹150 करोड़ → ₹200 करोड़ के लिए 10 अंक; 50 एम्बुलेंस प्रति अनुबंध और 1001 एम्बुलेंस के एकल अनुबंध के लिए 15 अतिरिक्त अंक जोड़े गए — ये शर्तें केवल खास कंपनी के अनुकूल थीं। 7 संस्थाओं ने प्री-बिड में आपत्ति जताई, लेकिन विभाग द्वारा सभी की आपत्ति अनसुनी कर दी गई। केवल खास कंपनी ने सिर्फ बोली लगाई। फिर से 22 सितंबर 2025 को निविदा रद्द कर दी गई।
तीसरी निविदा (Ref. No.: S. No.194(R1)/CGMSCL/2025-26, 24 सितंबर 2025) में पक्षपातपूर्ण शर्तें बरकरार रखी गईं। 8 संस्थाओं ने प्री-बिड में आपत्ति जताई, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। 16 अक्टूबर 2025 को केवल खास कंपनी ने बोली लगाई। खास कंपनी के अनुरूप बनाई गई नियम और शर्तों ने बाकी कंपनियों को बोली लगाने से बाहर कर दिया गया। CGMSC अब एकमात्र बोली को स्वीकार करने की तैयारी कर रहा है, जबकि नियमों के अनुसार एकमात्र बोलीदाता होने पर पुनः निविदा अनिवार्य है।
कई सक्षम कंपनियां, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, त्रिपुरा, उत्तराखंड में 200-500 एम्बुलेंस चला रही हैं, प्री-बिड में शामिल हुईं। इनका प्रतिक्रिया समय 12-15 मिनट है (छत्तीसगढ़: 25-30 मिनट), जान बचाने की दर 90% से अधिक। ये GPS, AI डिस्पैच, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, टेलीमेडिसिन का उपयोग करती हैं। इनके सुझाव — अनुभव और टर्नओवर में लचीलापन, नवाचार को अंक — CGMSC ने नजरअंदाज कर दिए।
यह प्रक्रिया शुरू से अंत तक सीजीएमएससी की खास कंपनी को फायदा पहुंचाने और योग्य संस्थाओं को बाहर करने के लिए डिजाइन की गई थी।
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