सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर चल रहे विवाद पर शुक्रवार को बड़ा फैसला आया. कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूल, अस्पताल और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखा जाए. यह आदेश उन याचिकाओं में से एक पर आया, जिनमें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था की मांग की गई थी. इस मामले में याचिकाकर्ता अधिवक्ता ननिता शर्मा ने कोर्ट के आदेश को “दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन जरूरी कदम” बताया. कोर्ट के आदेश के बाद वह मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गईं और कहा कि हालांकि फैसला नागरिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह जानवरों के लिए एक कठिन स्थिति है. भावुक होने के बाद वह मीडिया की सुर्खियों में आ गईं. अब लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं. तो आइए इस खबर में उनके बारे में जानते हैं.
फैसले के बाद सोशल मीडिया पर ननिता शर्मा का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कोर्ट के बाहर भावुक दिखीं. उनकी यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि मामला उनके लिए सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा था. लंबे समय से वह इस केस को नागरिक सुरक्षा के नजरिए से देख रही थीं और अब इस फैसले के बाद उनकी भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है.
कानूनी करियर: तीन दशक से सक्रिय वकील
ननिता शर्मा का कानूनी करियर तीन दशकों से अधिक पुराना है. उन्होंने 1988 में वकालत शुरू की और 1995 में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) बनीं. इससे उन्हें सुप्रीम कोर्ट में सीधे केस दायर करने का अधिकार मिला. वह लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के पैनल से जुड़ी रहीं और कई सामाजिक मुद्दों पर मुकदमे लड़ीं.
कानून के साथ-साथ ननिता शर्मा समाज सेवा में भी सक्रिय हैं. वह ‘कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया)’ नामक एनजीओ की महासचिव हैं, जो 1983 से मानवाधिकार और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहा है. उनका मानना है कि “कानून और समाज सेवा, दोनों का लक्ष्य समान है – लोगों की सुरक्षा और सम्मान.”
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को दिए आदेश में कहा कि संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को निर्धारित शेल्टरों में शिफ्ट किया जाए और उन्हें वापस उसी क्षेत्र में छोड़ने की अनुमति नहीं होगी. कोर्ट ने कहा कि यह कदम नागरिकों, खासकर बच्चों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.
ननिता शर्मा ने कहा कि यह आदेश एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों से अलग है, जिनमें कुत्तों को उनके क्षेत्र से हटाने की मनाही है. उन्होंने कहा, “कुत्ते के काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कोर्ट ने जो कहा, वह जरूरी था. लेकिन यह आदेश दिल को छूने वाला भी है.” उन्होंने आगे कहा कि वह ईश्वरीय न्याय (Divine Justice) में भरोसा रखती हैं और उम्मीद करती हैं कि इस फैसले से इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
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