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दुर्ग - भिलाई और भी
नवीन कानून, एन.डी.पी.एस. एवं POCSO एक्ट पर पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 नवम्बर 2025,  10:12 PM IST
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नवीन कानून, एन.डी.पी.एस. एवं POCSO एक्ट पर पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

 दुर्ग पुलिस द्वारा विवेचकों को किया गया अद्यतन कानूनों की जानकारी से सशक्त
भिलाई। 
दुर्ग पुलिस द्वारा नवीन कानून, एन.डी.पी.एस. (NDPS) एवं पॉक्सो (POCSO) एक्ट के अंतर्गत पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन महात्मा गांधी कला मंदिर, भिलाई इस्पात संयंत्र, सिविक सेंटर, भिलाई में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल (भा.पु.से.) के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में भीम सिंह राजपूत, उप संचालक अभियोजन जिला दुर्ग मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ मेघेश्वर दिल्लीवार, शासकीय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक जिला दुर्ग, श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार, विशेष लोक अभियोजक (POCSO) जिला दुर्ग, प्रकाश शर्मा, विशेष लोक अभियोजक जिला दुर्ग, सूरज शर्मा, विशेष लोक अभियोजक (NDPS) जिला दुर्ग एवं सुनील चौरसिया, जिला अभियोजन अधिकारी दुर्ग सहित अनेक सहायक अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे।

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प्रशिक्षण सत्र के दौरान भीम सिंह राजपूत ने स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (NDPS Act) के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विवेचकों को बताया कि ऐसे मामलों की विवेचना में कानूनी प्रावधानों की गहन समझ अत्यंत आवश्यक है ताकि अभियोजन की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
वहीं मेघेश्वर दिल्लीवार ने NDPS मामलों की विवेचना के दौरान होने वाली त्रुटियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विवेचक यदि जांच की प्रत्येक प्रक्रिया को विधिक दृष्टिकोण से समझें और आवश्यक दस्तावेजीकरण सही ढंग से करें, तो दोषसिद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार ने POCSO अधिनियम से संबंधित प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बालकों के विरुद्ध लैंगिक अपराधों के मामलों के लिए विशेष न्यायालय गठित किए गए हैं तथा CRPC की धारा 173 और BNSS की धारा 193 के अंतर्गत ऐसे मामलों में 60 दिनों के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने विवेचकों से कहा कि यदि चालान प्रस्तुत करने से पूर्व किसी प्रकार की शंका या त्रुटि हो तो वे लोक अभियोजकों से परामर्श लेकर त्रुटि सुधार कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने पीड़िता के मामलों में डीएनए परीक्षण करवाने की प्रक्रिया पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर)  सुखनंदन राठौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (IUCAW) श्रीमती पद्मश्री तंवर, उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) चंद्रप्रकाश तिवारी सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस कर्मी एवं विवेचक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को अद्यतन कानूनों से परिचित कराना, जांच की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा अभियोजन की सफलता दर बढ़ाना था। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित प्रतिभागियों को कानून की बारीकियों को व्यवहार में लाने हेतु प्रेरित किया और कहा कि ऐसे प्रशिक्षण सत्र भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि पुलिस बल को विधिक ज्ञान से सशक्त बनाया जा सके।

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