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तीन दशक बाद मिला इंसाफ: ग्वालियर हाईकोर्ट ने गन्ना विकास परिषद कर्मचारी सुरेंद्र मोहन की सेवा 1988 से नियमित मानने का आदेश दिया
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 नवम्बर 2025,  10:38 PM IST
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तीन दशक बाद मिला इंसाफ: ग्वालियर हाईकोर्ट ने गन्ना विकास परिषद कर्मचारी सुरेंद्र मोहन की सेवा 1988 से नियमित मानने का आदेश दिया

ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने गन्ना विकास परिषद, डबरा के कर्मचारी सुरेंद्र मोहन को 30 साल बाद बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उनकी सेवा को 2 सितंबर 1988 से नियमित माना जाए और उन्हें सभी वेतन, पेंशन व पदोन्नति संबंधी लाभ तीन महीने के भीतर प्रदान किए जाएं।

सुरेंद्र मोहन ने 1981 में शुगरकेन डेवलपमेंट काउंसिल (डबरा) में काम शुरू किया था। वर्ष 1988 में उनकी सेवा नियमित की गई थी, लेकिन परिषद के भंग होने के बाद उन्हें कृषि विभाग में समाहित कर दिया गया।

 2003 के बाद बंद हुआ वेतन, 2014 में दोबारा नियुक्ति का आदेश
साल 2003 के बाद सुरेंद्र मोहन को वेतन मिलना बंद हो गया। मजबूर होकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सरकार ने बाद में उन्हें 4 सितंबर 2014 से नई नियुक्ति देने का आदेश जारी किया, जिसे कोर्ट ने कानून के विरुद्ध करार दिया।

 कोर्ट ने कहा – सरकार का रवैया अनुचित
न्यायालय ने टिप्पणी की कि सरकार का यह कदम अनुचित और अन्यायपूर्ण है। कोई भी कर्मचारी जिसने वर्षों तक सेवा दी हो, उसे “नई नियुक्ति” मानना न केवल कानून के खिलाफ, बल्कि सेवाकालीन अधिकारों का हनन है।

 कोर्ट का स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि—

  • सुरेंद्र मोहन की सेवा अवधि 1988 से निरंतर मानी जाए।

  • उन्हें पूर्ण वेतन अंतर, पेंशन, और पदोन्नति के लाभ दिए जाएं।

  • यह प्रक्रिया तीन माह के भीतर पूरी की जाए।

यह फैसला उन सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है, जिनकी सेवाएं वर्षों की मेहनत के बावजूद अनुचित प्रशासनिक आदेशों से प्रभावित हुई हैं।

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