दुर्ग । ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज।
दुर्ग जिला अस्पताल में शनिवार को नसबंदी के दौरान दो महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर दिया है। ऑपरेशन के दौरान दोनों महिलाओं को अचानक झटके और शरीर में अकड़न आने लगी। आनन-फानन में उन्हें 200 मीटर दूर आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने बताया कि दोनों की मौत का संभावित कारण सर्जरी में इस्तेमाल की गई किसी दवा का रिएक्शन हो सकता है। दवाओं के सैंपल जब्त कर जांच के लिए भेजे गए हैं।
चार घंटे में दो परिवारों की खुशियां मात में बदलीं
पहली मृतका पूजा यादव (27 वर्ष) बजरंग नगर निवासी थी। उसने चार दिन पहले ही गर्भपात कराया था, तब कोई जटिलता नहीं हुई थी। शनिवार सुबह वह नसबंदी के लिए अस्पताल पहुंची। सर्जरी के दौरान अचानक झटके आए और कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ गई। आईसीयू में शिफ्ट करने के बाद उसने दम तोड़ दिया।
दूसरी महिला किरण यादव (30 वर्ष) सिकोला भाटा की निवासी थी। सुबह उसने सिजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया, लेकिन उसी दौरान नसबंदी करते वक्त उसे भी झटके आने लगे। शाम तक वह भी चल बसी।
परिजनों के अनुसार किरण बिल्कुल स्वस्थ थी — सुबह बच्चे के जन्म से घर में खुशी थी, और शाम तक मातम छा गया।
सर्जरी के दौरान कौन सी दवाएं दी गईं
सिविल सर्जन के अनुसार पूजा यादव को नसबंदी के दौरान बुपीवाकेन 3 एमएल, मिडान 1 एमजी, और 2 आरएल (रिंगर लैक्टेट) दिया गया था।
वहीं किरण यादव को बुपीवाकेन 2.2 एमएल, ऑक्सीटोसीन 10 आईयू, 2 आरएल और 1 डीएनएस दिया गया था।
डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं में से किसी एक के रिएक्शन की संभावना से इनकी हालत बिगड़ी होगी।
9 में से 7 सर्जरी सफल, दो में हादसा
शनिवार को मदर-चाइल्ड यूनिट में कुल 9 सर्जरी हुईं — इनमें पूजा की केवल नसबंदी और किरण की सिजेरियन के साथ नसबंदी थी। बाकी 7 महिलाओं की सर्जरी सामान्य रही।
सर्जरी टीम में डॉ. उज्जवला देवांगन, डॉ. विनीता ध्रुवे, डॉ. रिंपल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और डॉ. पूजा वर्मा (एनेस्थेटिस्ट) शामिल थीं।
“संभावित कारण दवा का रिएक्शन” — सिविल सर्जन
“दोनों महिलाओं को सर्जरी के दौरान झटके और अकड़न आई थी। उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया। जीवन रक्षक दवाएं दी गईं, पर अफसोस वे बच नहीं सकीं। प्राथमिक रूप से दवा के रिएक्शन की आशंका है। दवाओं की जब्ती कर ली गई है, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।”
— डॉ. आशीषन मिंज, सिविल सर्जन, दुर्ग
मानवीय पहलू : एक की गोद सूनी, दूसरी के नवजात के सिर से उठा साया
मौतों के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मचा है। पूजा यादव के घर दो छोटे बच्चे हैं, वहीं किरण का नवजात अब मां के बिना है। परिजनों की हालत ऐसी है कि वे कुछ बोल नहीं पा रहे।
सिर्फ चार घंटे में दो परिवारों की दुनिया उजड़ गई — सवाल यह है कि क्या यह मेडिकल लापरवाही थी या प्रणालीगत चूक....
अब जांच ही देगी जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की जांच के निर्देश दे दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ड्रग टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण स्पष्ट होगा।
फिलहाल, जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं — क्या पर्याप्त सुरक्षा मानक अपनाए गए थे, क्या दवाओं की वैधता की जांच की गई थी, और क्या मरीजों की प्री-सर्जरी स्थिति का पूरा मूल्यांकन हुआ था?
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