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छत्तीसगढ़ में जैव ईंधन के उत्पादन में 3,500 करोड़ रुपये का हो रहा निवेश
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 9 नवम्बर 2025,  07:16 PM IST
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छत्तीसगढ़ में जैव ईंधन के उत्पादन में 3,500 करोड़ रुपये का हो रहा निवेश

सीबीडीए द्वारा बायोफ्यूल एक्सपो तथा सेमीनार का आयोजन

रायपुर/छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण द्वारा राजधानी रायपुर में बायोफ्यूल एण्ड बायो एनर्जी एक्सपो का आयोजन 7 से 9 नवंबर तक स्थानीय श्रीराम बिजेनस पार्क में किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल रोडमैप विजन 2024-29 पर आयोजित सेमीनार में बायोफ्यूल तकनीक पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री सुमित सरकार ने छत्तीसगढ़ की जैव ईंधन रोडमैप की चर्चा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य को बायोफ्यूल के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की पहल की जा रही है। 

 

 सीईओ श्री सुमित सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ में निजी कंपनियों ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024-2030 के अनुरूप, लगभग 3,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। गेल और बीपीसीएल जैसी ओजीएमसी ने विभिन्न यूएलबी में 8 एमएसडब्ल्यू/बायोमास आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ओएनजीसी ग्रीन और एचपीसीएल ग्रीन वर्तमान में सीबीजी उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए विभिन्न स्थानों का सर्वेक्षण कर रही हैं।

 

 राज्य में चावल, मक्का और चने के अवशेषों का उपयोग करके बायोएथेनॉल और कम्प्रेस्ड बायोगैस बनाने के लिए फीडस्टॉक-आधारित परीक्षण किया जा रहा हैं। इसके साथ ही कृषि अपशिष्ट को सब्सट्रेट के रूप में उपयोग करके एंजाइम उत्पादन परीक्षण और नए माइक्रोबियल स्ट्रेन का संवर्धन हो रहा है। उन्होंने बताया कि बायो-विमानन ईंधन के क्षेत्र में सीबीडीए अब बायोमास-आधारित हाइड्रोजन के उत्पादन की तैयारी कर रहा है, जिसका उपयोग बाद में हाइड्रोप्रोसेस्ड एस्टर और फैटी एसिड तकनीक के माध्यम से एसएएफ उत्पादन के लिए किया जाएगा।

 

छत्तीसगढ़ में अधिशेष चावल को प्राथमिक फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करके बायोएथेनॉल उत्पादन के लिए पहले ही एक मानक संचालन प्रक्रिया विकसित कर ली है। हाल ही में, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर के सहयोग से, सीबीडीए बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स स्थल, ग्राम गोढ़ी, जिला दुर्ग में एक वैकल्पिक फीडस्टॉक स्थापित करने के लिए चुकंदर की खेती पर परीक्षण शुरू किया है। अगला कदम इथेनॉल उत्पादन के लिए इसकी क्षमता का परीक्षण करना है, जिससे भारत के 20 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य और उससे आगे की उपलब्धि में सहायता मिलेगी, जिससे इस पहल की निरंतर सफलता सुनिश्चित होगी।

इस सेमीनार में गैल के सीजीएम श्री मोहम्मद नजीब कुरैशी और डीजीएम जितेन्द्र पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के पाइप लाईन नेटवर्क के बारे में जानकारी दी। बीपीसीएल के डीजीएम श्री संजय ठाकुर ने छत्तीसगढ़ में कम्प्रेस बायोगैस की संभावनाओं के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। इसी प्रकार रिलायंस इंडस्ट्रीज के डीजीएम श्री सुशील वर्मा ने धान से कम्प्रेस बायोगैस उत्पादन के बारे में जानकारी दी।

  इसी प्रकार आरईवीवाय के इन्वारमेंटल साल्यूशन प्रा.लि. के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. वनिता प्रसाद ने बायोगेस प्लांट के संचालन, एट्रीएम इनोवेशन प्रा.लि. पुणे के डायरेक्टर श्री राजेश दाते ने एनोरोबिक काम्पोस्टिंग सिस्टम, इंग्रोटेक एक्वा इंजीनियर्स प्रा.लि. संबलपुर के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री सुकांत कुमार मेहेर ने एसटीपी प्लांट से कम्प्रेस बायोगैस की उत्पादन की संभावनाओं और एईसी एग्रीटेक प्रा.लि. के सीईओ श्री जितेन्द्र नारायण ने कम्प्रेस बायोगैस पॉलिसी, प्रोक्योरमेंट और प्राइसिंग के बारे में जानकारी दी।


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