• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
ग्वालियर और भी
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज की:कोर्ट ने कहा- पुलिस विभाग एक साथ 'गरम और ठंडा' रुख नहीं रख सकता
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 12 नवम्बर 2025,  11:14 PM IST
  • 404
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज की:कोर्ट ने कहा- पुलिस विभाग एक साथ 'गरम और ठंडा' रुख नहीं रख सकता

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस विभाग एक ही समय में 'गरम और ठंडा' रुख नहीं रख सकता। यह याचिका राज्य शासन द्वारा दायर की गई थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि विभाग अपनी ही बातों से पलट नहीं सकता। यह मामला राज्य शासन बनाम पूर्व कॉन्स्टेबल रजनेश सिंह भदौरिया से संबंधित है।

अदालत ने कहा कि जब खुद पुलिस महानिदेशक ने हलफनामा देकर यह स्वीकार किया था कि विभागीय जांच अधिकारी ने कोई तथ्य नहीं छुपाया, तो सरकार को पुनर्विचार याचिका दायर करने की आवश्यकता नहीं थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पूर्व कॉन्स्टेबल रजनेश सिंह की पूर्णबहाली से राज्य सरकार को कोई आर्थिक नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई संबंधित दोषी अधिकारी से कराई जाए।

कोर्ट ने कहा- विभाग को

अदालत ने कहा यदि पुलिस विभाग यह मानता है कि उसके अधिकार अदालत के समक्ष तथ्य छुपा सकते हैं और यह अनुशासन में परंपरा के अनुरूप है तो फिर यह बेहद गंभीर स्थिति है। विभाग एक ओर यह दावा नहीं कर सकता है कि कोई तथ्य नहीं छुपाए गए और दूसरी ओर कहे कि अदालत को पूरे तथ्य बताए नहीं गए।

क्या है मामला

कंपू स्थित एसएएफ बटालियन में पदस्थ राजनेश सिंह सदो‍रिया का आरोप है कि उन्हें वर्ष 2012 में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद राजनेश ने याचिका दायर कर कहा कि विभागीय जांच में न तो कोई अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही अभियोजन की भूमिका ठीक तरह से निभाई गई। इसके बाद यह मामला शुरू हुआ।

अवमानना अलग से

मामले में पहले जारी अवमानना नोटिस को लेकर अदालत ने कहा कि यह कार्यवाही अलग से जारी रहेगी। यह नोटिस शैलेंद्र भारती सहायक कमांडेंट 14वीं बटालियन एसएएफ ग्वालियर को जारी किया गया था। अदालत ने कहा इस आदेश का अवमानना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं अदालत ने कहा कि राज्य शासन चाहे तो इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर सकता है।

RO. NO 13404/ 41

RO. NO 13404/ 41

Add Comment


Add Comment

RO. NO 13404/ 41
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 41
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg
RO. NO 13404/ 41
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 41
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter