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महुआ में तेजप्रताप को करारी हार — नई पार्टी, वोट बैंक में बिखराव और मजबूत प्रतिद्वंद्वी बने हार की वजह
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 14 नवम्बर 2025,  06:50 PM IST
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महुआ में तेजप्रताप को करारी हार — नई पार्टी, वोट बैंक में बिखराव और मजबूत प्रतिद्वंद्वी बने हार की वजह

ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज़ | पटना

बिहार चुनाव 2025 में महुआ सीट से बड़ा उलटफेर देखने को मिला। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को LJP (रामविलास) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने करीब 35 हजार वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। नतीजों के बाद तेजप्रताप समर्थकों में मायूसी छा गई है।

तेजप्रताप इस बार अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) से मैदान में थे। उन्होंने विकास, बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों को अपना एजेंडा बनाया, लेकिन महुआ के मतदाताओं ने इस बार किसी और विकल्प पर ज्यादा भरोसा जताया।


तेज प्रताप की हार के 5 बड़े कारण

1. नई पार्टी पर भरोसा न बन पाना

तेज प्रताप ने RJD छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाई, लेकिन जनशक्ति जनता दल (JJD) की संगठनात्मक मजबूती और ज़मीनी पकड़ बहुत कमजोर रही। मतदाता नई पार्टी पर भरोसा करने में हिचके।

2. यादव वोट बैंक में बिखराव

तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के बीच राजनीतिक दूरी और RJD से टूटने के बाद पारंपरिक यादव–MY वोट बैंक तीन हिस्सों में बँट गया—

  • RJD की ओर

  • LJP की ओर

  • और थोड़ा हिस्सा तेजप्रताप की नई पार्टी की ओर

यह विभाजन तेजप्रताप के लिए भारी पड़ा।

3. LJP उम्मीदवार की मजबूत चुनौती

संजय कुमार सिंह स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन और NDA की हवा के सहारे तेजप्रताप पर भारी पड़े। उनकी प्रचार रणनीति और बूथ प्रबंधन तेजप्रताप की टीम से कहीं बेहतर माना गया।

4. संगठन और संसाधन की कमी

नयी पार्टी होने की वजह से तेजप्रताप के पास न तो मजबूत कार्यकर्ता बल था, न चुनावी प्रबंधन की धार।
महुआ सीट पर RJD और NDA दोनों की पार्टी मशीनरी अधिक सक्रिय और संगठित दिखी।

5. विवादों और छवि का असर

तेजप्रताप का राजनीतिक सफर अक्सर विवादों, बयानबाज़ी और RJD से टकराव में घिरा रहा।
RJD से निष्कासन और परिवार से दूरी जैसी बातों ने उनके प्रति मतदाताओं में संदेह पैदा किया। यह छवि चुनावी नुकसान में तब्दील हुई।

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