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बैंकिंग से खेतों तक: जल संकट में फसल विविधीकरण की नई राह दिखा रहे विवेक धर दीवान
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 16 दिसम्बर 2025,  04:08 PM IST
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बैंकिंग से खेतों तक: जल संकट में फसल विविधीकरण की नई राह दिखा रहे विवेक धर दीवान

रायपुर/ लगभग दो दशकों तक बैंकिंग क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर सेवाएँ देने के बाद विवेक धर दीवान ने जीवन का ऐसा मोड़ लिया, जो आज जल संरक्षण और टिकाऊ खेती की मिसाल बन गया है। रायपुर में उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट) जैसे वरिष्ठ पद पर रहते हुए उन्होंने नवंबर 2024 में स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गाँव ताला (विकासखंड बेमेतरा) लौटने का निर्णय लिया और कृषि को अपना नया लक्ष्य बनाया।

गाँव लौटकर उन्होंने देखा कि क्षेत्र में खरीफ और रबी—दोनों मौसमों में धान की खेती की जा रही है, जबकि धान अधिक जल मांगने वाली फसल है और रबी मौसम के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। लगातार जल संकट और राज्य में न्यूनतम वर्षा की स्थिति को समझते हुए विवेक धर दीवान ने न केवल स्वयं बदलाव की पहल की, बल्कि पंचायत के तीनों गांवों को नॉन-धान क्षेत्र (नॉन पेड्डी जोन) घोषित कराने में भी अहम भूमिका निभाई।

इस पहल के तहत रबी मौसम में दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी गई। गेहूं, चना, रागी, सूरजमुखी और मूंग जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया गया। स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विवेक धर दीवान ने अपनी कृषि भूमि में गेहूं, सरसों, रागी और सूरजमुखी की बुवाई की। खेती में आधुनिक जीरो सीड ड्रिल तकनीक अपनाई गई तथा फसल अवशेष प्रबंधन का सख्ती से पालन किया गया, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक खाद का लाभ मिलता है।

उन्होंने बताया कि जब जिले में एक वर्ष से अधिक समय से जल संकट बना हुआ है, तब ऐसी रबी फसलों को अपनाना आवश्यक है जिनके पूरे फसल चक्र में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा गेहूं 2500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक, रागी 7000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तथा सरसों 6200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

विवेक धर दीवान की यह पहल जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और लाभकारी कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी सोच, तकनीक और नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि खेती को न केवल टिकाऊ, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया जा सकता है। आज उनकी यह प्रेरक कहानी बेमेतरा जिले के किसानों के लिए नई दिशा और आत्मविश्वास का स्रोत बन रही है।

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