दुर्ग। दुर्ग ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न ग्रामो उतई, सुभाष चौक डुंडेरा, कसारीडीह दुर्ग पोटियाकला, में आयोजित मनखे मनखे एक समान का संदेश देने वाले सतनाम पंथ के संस्थापक छत्तीसगढ़ की संत परंपरा के अग्रणी बाबा गुरु घासीदास की 269वीं जयंती समारोह के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग ग्रामीण विधायक व राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष ललित चंद्राकर सम्मिलित होकर जैतखाम गुरुगद्दी व बाबा गुरु धासीदास जी के तैल चित्र पर पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश वासियों को गुरु घासीदास जयंती की शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर उतई मंडल अध्यक्ष शीतला ठाकुर, उतई सरपंच डोमार साहू, छबि लाल साहू, सतनामी समाज अध्यक्ष बी. आर. मौर्य.पार्षदगण विक्की चंद्राकर, हरीश नायक, विधायक प्रतिनिधि रिसाली निगम गोविन्द साहू, केशव महिपाल, राजूराम, पूर्व सभापति लुमेश्वर चंद्राकर, पार्षद रोहित धनकर, योगेश महिपाल, महिला अध्यक्ष शिवकुमारी जोशी, इंद्रजीत सोनवानी, परम परमेश्वर देशलहरे, नंदू साहू, नारायण निर्मलकर, राजेन्द्र यादव, बिरेन्द्र टंडन, देवेन्द्र महिपाल, बृज राय, राजेश, रोहित चंद्राकर, दीपक बहादुर, रंजन सिन्हापार्षद मनीष कोठारी, सुजीत चंदेल, समिति अध्यक्ष कमलेश जांगड़े, रंजीत चंदेल, प्रशांत कोसरे,राधे कोसरे, शिव डहरिया, विश्वनाथ जोशी, राधेश्याम कोसरे,धनऊ कोसरे संतु जांगड़े, ईश्वर री देशलहरे, चन्द्रिका बंजारे, राजकुमार टंडन व समस्त सतनामी समाज गंगा के लोग उपस्थित रहे व समिति द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि गुरु घासीदास जी केवल एक संत ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने ऐसे समय में समाज को सत्य, अहिंसा और समानता का मार्ग दिखाया, जब समाज अनेक प्रकार की कुरीतियों और भेदभाव से ग्रस्त था। गुरु घासीदास जी का अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” आज भी समाज को जोड़ने और मानवता की रक्षा करने का सशक्त सूत्र है विधायक चंद्राकर ने आगे कहा कि गुरु घासीदास जी ने जाति, ऊँच-नीच और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद कर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने लोगों को आत्मसम्मान, नैतिकता और परिश्रम के महत्व से परिचित कराया। आज आवश्यकता है कि हम सभी उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा ही किसी भी राष्ट्र की मजबूती की नींव होते हैं। गुरु घासीदास जी के आदर्शों पर चलकर ही एक सशक्त, शिक्षित और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। श्री चंद्राकर ने युवाओं से आह्वान किया कि वे गुरु घासीदास जी के विचारों से प्रेरणा लेकर शिक्षा, सेवा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ें तथा समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
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