दुर्ग। दुर्ग पिसे गांव में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय आवासीय शिविर का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। ‘तोड़ना सारी हदों को सीख बहते नीर से’ की प्रेरक पंक्तियों के साथ आरंभ इस शिविर में न सिर्फ शिक्षा, सेवा और संस्कार का संगम देखा जा रहा है, बल्कि युवाओं में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी जागृत हो रहा है।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अलका मेश्राम ने शिविर के उद्घाटन समारोह में उपस्थित होकर विद्यार्थियों को जीवन के संघर्ष, मानवता और सेवा भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एनएसएस कैंप के माध्यम से छात्र अपने व्यक्तित्व का विकास करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी समझते हैं। सेवा, जागरूकता और संवेदना ही एक शिक्षित युवाशक्ति की असली पहचान है।
कार्यक्रम समन्वयक जनेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर छात्रों में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। सामुदायिक जीवन और समूह कार्य सीखने का यह अवसर उनके भविष्य निर्माण में निर्णायक सिद्ध होगा।
शिविर में डॉ अजय आर्य का ओजस्वी संबोधन छात्रों में जोश और आत्मबल का संचार कर गया। उन्होंने कहा-‘बांध कर रखे हैं क्यों पांव अपने जंजीर से
तोड़ना सारी हदों को सीख बहते नीर से
कर तू कोशिश ऐसी जो चाहे वह सब मिले तुझे
और जो ना मिल सके वह छीन ले तकदीर से।’
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उन्होंने आगे कहा कि शिविर का उद्देश्य छात्रों को संघर्ष और सादगी से परिचित करना है। सुविधाओं में पलने वाला भविष्य कमजोर होता है, जबकि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को स्टील जैसा मजबूत बनाती हैं। एयर कंडीशन माहौल से बाहर निकलकर धूप, धूल और पसीने में जीने का अभ्यास ही वास्तविक जीवन की सीख देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोटा में प्रतिभाशाली छात्र पढ़ने जाते हैं, लेकिन वहां संघर्ष क्षमता की कमी के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। एनएसएस शिविर में भाग लेने वाले युवाओं में हार स्वीकारने की प्रवृत्ति कभी नहीं पनप सकती।
उल्लेखनीय है कि शिविर में 50 विद्यार्थी शामिल हैं, जो पिसे गांव के प्राथमिक विद्यालय भवन में निवास कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह में ग्रामवासियों ने छात्रों के साथ नृत्य कर इस आयोजन को उत्सवी और जीवंत बना दिया। यह अद्भुत दृश्य समाज और विद्यार्थियों की एकता एवं स्वीकार्यता का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ चांदनी मरकाम ने सभी अतिथियों और ग्रामीण समुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस शिविर से ग्रामीणों व विद्यार्थियों के बीच समझ, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। आने वाले दिनों में विद्यार्थी स्वच्छता अभियान, जागरूकता रैली, स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम, साक्षरता प्रयास और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गांव में सामाजिक परिवर्तन का संदेश फैलाएंगे।
दुर्ग पिसे गांव में आयोजित यह राष्ट्रीय सेवा शिविर शिक्षा और समाज के बीच सेतु का निर्माण कर रहा है। यहां विद्यार्थी पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन का सच्चा पाठ सीख रहे हैं। संघर्ष, समर्पण, संवाद और सेवा का पाठ। आने वाले समय में यह शिविर युवाओं के भविष्य और गांव की प्रगति दोनों को नई दिशा प्रदान करेगा। अतिथियों ने छात्र-छात्राओं के द्वारा बनाए गए भोजन की प्रशंसा की और उनके साथ भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम के संचालन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ डॉ. अलका मेश्राम, प्रोफेसर जैनेंद्र दीवान, गिरधर मरकाम विशेष भूमिका निभा रहे हैं।
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