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7 करोड़ रुपये का धान—चूहे खा गए या फिर भ्रष्टाचार ? : अरुण वोरा
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 8 जनवरी 2026,  03:26 PM IST
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7 करोड़ रुपये का धान—चूहे खा गए या फिर भ्रष्टाचार? : अरुण वोरा

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से धान खरीदी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान में से 26 हजार क्विंटल धान रहस्यमय तरीके से गायब पाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में किसानों से खरीदे गए कुल 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान को जिले के दो संग्रहण केंद्रों—बाजार चारभाठा और बघर्रा—में रखा गया था। जब धान का उठाव पूरा होने के बाद संग्रहण केंद्रों में मिलान किया गया, तो दोनों केंद्रों से कुल 26 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आई।
-बाजार चारभाठा केंद्र पर सबसे बड़ी गड़बड़ी
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर स्थिति बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र की सामने आई है, जहां अकेले 22 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है। इस केंद्र के प्रभारी के खिलाफ उच्च स्तरीय शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें करीब 5 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।
-फर्जीवाड़े के कई तरीके
शिकायतों के अनुसार, संग्रहण प्रभारी ने उपार्जन केंद्र के प्रभारी के साथ मिलकर धान की फर्जी आवक-जावक दिखाई,डैमेज धान के फर्जी बिल बनाए,मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई,और सबूत मिटाने के लिए संग्रहण केंद्रों में लगे CCTV कैमरों से बार-बार छेड़छाड़ की।
अधिकारियों की सफाई मामले पर सफाई देते हुए जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने कहा कि संग्रहण प्रभारी प्रीतेश पांडेय को हटा दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि धान की जो कमी सामने आई है, वह मौसम, चूहों, दीमक और कीड़ों के कारण हुई है।वहीं, सहायक जिला खाद्य अधिकारी मदन साहू ने बताया कि बाजार चारभाठा केंद्र के प्रभारी के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद जांच टीम गठित की गई है और प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-अरुण वोरा का तीखा सवाल
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा—
 "हजारों क्विंटल धान चूहों द्वारा खा जाने की कहानी मैंने पहली बार सुनी है।“यह लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का मामला प्रतीत होता है। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाना इसे और गंभीर बनाता है।अगर 7 करोड़ रुपये का धान चूहे खा सकते हैं, तो फिर निगरानी व्यवस्था किस काम की है?कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।”
इस मामले ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि किसानों और आम जनता के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच्चाई सामने आती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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