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दुर्ग - भिलाई और भी
संरक्षित क्षेत्र नलघर बना ‘धर्मशाला’! लाश कांड के बाद भी लापरवाही जारी, क्या दुर्ग निगम फिर किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है..?
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 9 जनवरी 2026,  03:42 PM IST
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जिस स्थान से पूरे शहर को पीने का पानी सप्लाई होता हो, वहां इस तरह की लापरवाही जनस्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।

दुर्ग। नया बस स्टैंड के सामने स्थित संरक्षित क्षेत्र नलघर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। कुछ दिन पहले इसी नलघर में अज्ञात व्यक्ति की लाश मिलने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मामले में तत्कालीन जल विभाग के उप अभियंता विनोद माझी पर गाज गिरते हुए उन्हें हटाया गया था, लेकिन हालात बताते हैं कि सबक अब भी नहीं लिया गया।

 उसी नलघर परिसर में एसआईआर (SIR) के निराकरण के नाम पर शिविर लगाया जा रहा है। ज्ञात हो कि इसी नलघर से दुर्ग शहर में पीने के पानी की सप्लाई की जाती है, जिसे नियमानुसार पूर्णतः संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके बावजूद परिसर में भारी भीड़, लोगों का बेरोकटोक आना-जाना, मोबाइल पर बात करते घूमते लोग और अव्यवस्था साफ नजर आ रही है

लाश मिलने की घटना के बाद दुर्ग शहर की महापौर अलका बाघमार, पूर्व विधायक अरुण वोरा, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे थे और चाक-चौबंद सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे। कैमरे तो लगाए गए, लेकिन आज हालात यह हैं कि सीसीटीवी की लाइव निगरानी वाली एलईडी स्क्रीन बंद पड़ी है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि—जब अधिकारी एसआईआर निराकरण में व्यस्त हैं और कर्मचारी भीड़ को संभालने में लगे हैं, तो संरक्षित नलघर की निगरानी आखिर कौन कर रहा है..?

क्या निगम प्रशासन फिर किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है..?

वहीं नलघर में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि—

“शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार संरक्षित क्षेत्र नलघर में एसआईआर का कार्य किया जा रहा है, हम केवल निर्देशों का पालन कर रहे हैं।”

लेकिन जिस स्थान से पूरे शहर को पीने का पानी सप्लाई होता हो, वहां इस तरह की लापरवाही जनस्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।

नलघर में शव मिलने के बाद शुरू हुई जांच अभी भी जारी है, लेकिन उससे पहले ही संरक्षित क्षेत्र को इस तरह खोल देना नगर निगम की नीयत और नीति—दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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