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मकर संक्रांति पर 23 साल बाद षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, तिल से जुड़े उपाय देंगे विशेष फल
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 13 जनवरी 2026,  03:27 PM IST
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मकर संक्रांति पर 23 साल बाद षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, तिल से जुड़े उपाय देंगे विशेष फल

नई दिल्ली। इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण की शुरुआत होगी और इसी दिन भगवान विष्णु को समर्पित षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संयोग करीब 23 वर्षों बाद बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है।

मकर संक्रांति पर तिल से स्नान, तिल का दान और तिल का सेवन विशेष पुण्य प्रदान करता है। वहीं, षटतिला एकादशी के संयोग से तिल का महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन तिल से जुड़े उपाय करने से पापों का नाश होता है, ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

तिल से हवन से बढ़ेगा धन-धान्य
इस शुभ दिन प्रातः स्नान के बाद तिल में घी मिलाकर हवन करना विशेष फलदायी माना गया है। हवन के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

काले तिल का दान देगा दोषों से मुक्ति
मकर संक्रांति के दिन काले तिल का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। तिल के साथ गुड़ का दान करने से शनि दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। इससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और रुके हुए कार्यों में गति आती है।

भगवान को तिल का भोग शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव को तिल के लड्डू अर्पित करना कल्याणकारी होता है। तिल का दान और तिल का भोग लगाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन के कष्टों का नाश होता है।

तिल के तेल से मालिश और उबटन का महत्व
मकर संक्रांति पर तिल के तेल से मालिश करना और तिल का उबटन लगाना भी शुभ माना गया है। इस उपाय से अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है और शनि व सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का यह दुर्लभ संयोग पूरे वर्ष सुख, शांति और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना जा रहा है।

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