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धान भंडारण में सूखत एवं कीट-जनित क्षय: वैज्ञानिक एवं स्वाभाविक प्रक्रिया
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 14 जनवरी 2026,  07:31 PM IST
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धान भंडारण में सूखत एवं कीट-जनित क्षय: वैज्ञानिक एवं स्वाभाविक प्रक्रिया

सूखत और कीट-क्षति पर शासन की व्यवस्था से सुरक्षित हुई धान खरीदी प्रणाल

रायपुर /धान खरीदी एवं भंडारण व्यवस्था में सूखत एवं चूहा आदि कीटों के द्वारा धान के नुकसान को लेकर कुछ स्थानों पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह तथ्यों से परे है। वस्तुस्थिति यह है कि धान भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में आंशिक गिरावट (सूखत) एक स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है, जो वर्षों से चली आ रही है और देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखी जाती है।

सरकारी अभिलेखों के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सूखत कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली भौतिक-तकनीकी प्रक्रिया है।

धान संग्रहण केंद्रों में नमी, तापमान, भंडारण अवधि, परिवहन और वातावरण के प्रभाव से धान में प्राकृतिक रूप से कुछ प्रतिशत वजन घटता है। इसे वैज्ञानिक रूप से “मॉइस्चर लॉस” या “ड्रायिंग लॉस” कहा जाता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित, मापा और पारदर्शी बनाया जा सकता है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत की संभावना व्यक्त की गई है, जो पूर्व वर्षों के औसत के अनुरूप है और असामान्य नहीं है।  

वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था में संग्रहण केंद्रों पर डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग, परिवहन एवं उठाव की निगरानी जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता को तुरंत पहचाना जा सके। अब सूखत केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि डेटा-आधारित और ट्रैक-योग्य प्रक्रिया बन चुकी है। जहां यह प्राकृतिक सीमा में रहती है, उसे सामान्य माना जाता है, और जहां यह असामान्य रूप से अधिक पाई जाती है, वहां जांच और उत्तरदायित्व तय किया जाता है।

धान खरीदी व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके धान का पूरा और न्यायसंगत मूल्य मिले, भंडारण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो और पूरी प्रणाली विश्वसनीय और पारदर्शी बनी रहे।

आज प्रदेश की धान खरीदी प्रणाली डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान, स्टॉक ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं के माध्यम से देश की सबसे संगठित और निगरानी-आधारित व्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है। इससे किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ी है।

इसलिए यह स्पष्ट किया जाता है कि सूखत भंडारण की एक वैज्ञानिक वास्तविकता है — जिसे अब पहली बार पूरी पारदर्शिता, निगरानी और नियंत्रण के साथ संचालित किया जा रहा है।


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