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एक घर, तीन पार्षद और ऐतिहासिक जीत: जेल में बंद पति जीता, बाहर पत्नी और बेटे ने भी लहराया परचम! कोल्हे परिवार की 'पावरफुल हैट्रिक'
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 17 जनवरी 2026,  11:48 PM IST
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एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस 'हैट्रिक' जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में तहलका मचा दिया है।

मुंबई : महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में वैसे तो कई बड़े उलटफेर हुए, लेकिन जलगांव नगर निगम के नतीजों ने एक ऐसी कहानी लिखी है जो बरसों तक याद रखी जाएगी।

यह कहानी है 'कोल्हे परिवार' की, जिसने चुनावी मैदान में उतरकर न केवल विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया, बल्कि नगर निगम की तीन सीटों पर एक ही घर का कब्जा जमा दिया।

इस जीत ने साबित कर दिया कि अगर जनता का साथ हो, तो दीवारें भी जीत का रास्ता नहीं रोक सकतीं।

​जेल की दीवारों को चीरकर आई जीत की गूंज

​इस पूरे चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खी रहे ललित कोल्हे। गंभीर कानूनी मामलों के चलते ललित कोल्हे जेल में बंद थे, लेकिन उन्होंने वहीं से पर्चा भरा और चुनाव लड़ा।

जब नतीजे आए, तो हर कोई दंग रह गया—जेल में रहकर भी ललित ने अपने क्षेत्र के मतदाताओं के दिलों पर राज किया और भारी मतों से जीत हासिल की।

उनकी यह जीत उन विरोधियों के लिए बड़ा जवाब है जो उन्हें रेस से बाहर मान रहे थे।

​घर के तीन 'चिराग' अब सदन में साथ बैठेंगे

​कोल्हे परिवार की यह जीत किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। एक तरफ पिता जेल में रहकर जीते, तो दूसरी तरफ उनकी जीवनसंगिनी सिंधुताई कोल्हे ने अपने वार्ड में विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए। सोने पर सुहागा तब हुआ जब परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी उनके बेटे पीयूष ललित कोल्हे ने भी शानदार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया।

अब यह पहला मौका होगा जब एक ही घर के तीन सदस्य एक साथ नगर निगम की बैठकों में हिस्सा लेंगे।

​जीत के बाद छलक पड़े खुशी के आंसू

​जैसे ही जीत की हैट्रिक पूरी हुई, कोल्हे परिवार के समर्थकों में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। मतगणना केंद्र के बाहर एक बेहद भावुक नजारा देखने को मिला जब ललित कोल्हे की मां ने अपने पोते को दौड़कर गले लगा लिया।

उनकी आंखों से बहते आंसू उस संघर्ष की गवाही दे रहे थे, जो इस परिवार ने पिछले कुछ समय में झेला है। यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर 'जीत के जज्बे' के रूप में वायरल हो रही है।

​विरोधियों के लिए खतरे की घंटी

​जलगांव की स्थानीय राजनीति में इस परिवार का प्रभाव पहले भी था, लेकिन इस 'ट्रिपल धमाके' ने समीकरण बदल दिए हैं। अब सदन के भीतर कोल्हे परिवार एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जेल से मिली यह जीत सहानुभूति और भरोसे का मिला-जुला परिणाम है, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों के चुनावी गणित को फेल कर दिया है।

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