दुर्ग, / जिले में ग्रीष्मकालीन धान की खेती के साथ कम पानी में अधिक लाभ देने वाली दलहन, तिलहन एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता एवं शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, जहां जिले के कई प्रगतिशील किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की खेती शुरू की है। दुर्ग विकासखंड के ग्राम घुघसीडीह एवं पाटन विकासखंड के ग्राम तरीघाट और धमधा विकासखंड के ग्राम भाटाकोकड़ी के किसानों द्वारा सरसों, मक्का एवं चना की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है।
उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्रीष्मकालीन धान की खेती से भू-जल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि वैकल्पिक फसलें कम सिंचाई में अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा योजना) के अंतर्गत जिले में रबी मौसम हेतु दलहन (चना, मसूर) एवं तिलहन (सरसों) फसलों का प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाकर जल संरक्षण के साथ-साथ अपनी आय में वृद्धि करें तथा शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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