• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
छत्तीसगढ और भी
रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 24 जनवरी 2026,  08:41 PM IST
  • 135
रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र

रायपुर/रायपुर के गौरवशाली आयोजन रायपुर साहित्य उत्सव ने अपनी भव्यता और वैचारिक गंभीरता से प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के साहित्यिक और बौद्धिक जगत में एक सशक्त पहचान बनाई है। उत्सव के विभिन्न सत्रों के बीच ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, जिसने बुद्धिजीवियों, युवाओं और श्रोताओं को गहन विचार के लिए प्रेरित किया।

इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक एवं लेखक श्री राम माधव रहे। उन्होंने अपने संतुलित और तार्किक वक्तव्य के माध्यम से भारतीय चेतना को आधुनिक संदर्भों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। श्री राम माधव ने कहा कि किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु होता है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक राजनीति से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत का चिंतन न केवल मौलिक है, बल्कि तार्किक कसौटी पर भी पूरी तरह खरा उतरता है।

श्री राम माधव ने इस भ्रांति को भी सशक्त तर्कों के साथ खंडित किया कि बौद्धिकता केवल पश्चिमी दृष्टिकोण तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्र चिंतन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ-साथ आधुनिक यथार्थ को समझने की क्षमता भी रखता है। संवाद के दौरान उनके तर्कों की श्रृंखला ने विद्वानों के साथ-साथ युवाओं और सामान्य श्रोताओं को भी विशेष रूप से प्रभावित किया।

सत्र के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी अपने विचार साझा किए, जिससे पूरा वातावरण परंपरा और भविष्य की प्रगति के संतुलन से भरे वैचारिक संवाद में बदल गया।

सत्र के समापन पर यह संदेश उभरकर सामने आया कि असहमति भी तभी सार्थक है, जब वह तर्क और मर्यादा के दायरे में हो।

 रायपुर साहित्य उत्सव का यह सत्र केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि सकारात्मक, रचनात्मक और आत्मबोध से जुड़े बौद्धिक विमर्श की नई संस्कृति का प्रतीक बनकर सामने आया। इस आयोजन ने यह भी सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की माटी में लोक संस्कृति के साथ-साथ उच्चस्तरीय वैचारिक मंथन के लिए भी एक सशक्त और उर्वर भूमि मौजूद है।

RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40
RO. NO 13404/ 40

RO. NO 13404/ 40

Add Comment


Add Comment

629151020250338041002855468.jpg
RO. NO 13404/ 40
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 40
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg
RO. NO 13404/ 40
74809102025230106banner_1.jpg
RO. NO 13404/ 40
98404082025022451whatsappimage2025-08-04at07.53.55_42b36cfa.jpg





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter