• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
रायपुर और भी
पत्रकारिता और साहित्य’ पर पैनल चर्चा आयोजित
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 25 जनवरी 2026,  04:13 PM IST
  • 480
पत्रकारिता और साहित्य’ पर पैनल चर्चा आयोजित

*रायपुर साहित्य महोत्सव*

वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों ने साझा मूल्यों पर किया विमर्श

रायपुर/ रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे एवं समापन दिवस पर ‘पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित दूसरे सत्र के रूप में सम्पन्न हुआ। यह चर्चा दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री बबन प्रसाद मिश्र की स्मृति को समर्पित रही। पैनल में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सुश्री स्मिता मिश्र, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, श्री अवधेश कुमार और श्री गिरीश पंकज शामिल रहे, जबकि सत्र का संचालन श्री विभाष झा ने किया।

चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश पंकज ने कहा कि चाहे पत्रकारिता हो या साहित्य, लेखन का मूल आधार सदैव जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।

‘हरिभूमि’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि तथ्यों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है, वहीं तथ्यों और परिस्थितियों पर चिंतन साहित्य को व्यापक और गहन दृष्टि प्रदान करता है। उन्होंने पत्रकार और साहित्यकार के बीच मूलभूत अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकार प्रायः संस्थागत मर्यादाओं, मूल्यों और संपादकीय प्राथमिकताओं के दायरे में कार्य करते हैं, जबकि साहित्यकार को विषय के विविध आयामों को स्वतंत्रता के साथ अभिव्यक्त करने का अधिक अवसर मिलता है।

वरिष्ठ पत्रकार सुश्री स्मिता मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के बीच अंतर मुख्यतः शैली, भाषा और दृष्टिकोण का है। पत्रकारिता जहाँ तथ्यप्रधान होती है, वहीं साहित्य भावनाओं और संवेदनाओं की ओर अधिक झुकाव रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भाषा में संवेदनशीलता, रिपोर्टिंग में सहानुभूति और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की क्षमता दोनों ही क्षेत्रों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि दोनों ही जनमानस को प्रभावित करने की सामर्थ्य रखते हैं।

पत्रकार और साहित्यकार दोनों रूपों में अपने अनुभव साझा करते हुए श्री अवधेश कुमार ने पत्रकारिता और साहित्य को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। उन्होंने कहा कि उनके पत्रकारिता के अनुभव अक्सर उनके साहित्यिक लेखन की प्रेरणा बनते हैं तथा अनेक मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरें उन्हें उन विषयों के गहरे सामाजिक और मानवीय पक्षों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।

सत्र के दौरान संचालक श्री विभाष झा ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात पत्रकारों, जिनमें श्री मुक्तिबोध और श्री माधवराव सप्रे प्रमुख हैं, के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक चेतना के विस्तार के लिए साहित्य को माध्यम बनाया। पैनल में समकालीन पत्रकारिता में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर सुश्री स्मृति दुबे के कविता संग्रह ‘करुण प्रकाश’ तथा श्री लोकनाथ साहू ललकार के कविता संग्रह ‘यह बांसुरी की नहीं बेला है’ का विमोचन भी अतिथियों के करकमलों से सम्पन्न हुआ।


Add Comment


Add Comment

960030820260416021008965415.png





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter