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दिल्ली में इंसानियत शर्मसार: बिल न भरने पर निजी अस्पताल ने शव रोका, NHRC सदस्य ने मौके पर पहुंचकर दिलाया न्याय
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 26 जनवरी 2026,  02:40 PM IST
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देश की राजधानी दिल्ली, जहां बेहतर इलाज की मिसाल दी जाती है, वहीं एक निजी अस्पताल ने इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने ला दिया है। आरोप है कि दिल्ली के BLK Max अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों से एक लाख रुपये का अतिरिक्त बिल न चुकाने पर शव को कब्जे में रख लिया गया और परिजनों को ब्लैकमेल किया गया।

मामले की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो खुद मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। उनकी सख्ती के बाद आखिरकार मृतक का शव परिजनों को सौंपा गया।

NHRC सदस्य का बड़ा खुलासा
प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मध्यप्रदेश के एक मरीज की भर्ती के 24 घंटे के भीतर मौत हो गई थी। परिजन पहले ही 2 लाख रुपये जमा कर चुके थे, इसके बावजूद अस्पताल ने एक लाख रुपये की “नाजायज मांग” कर शव रोक लिया।

उन्होंने बताया कि उस दिन सरकारी छुट्टी होने के कारण आयोग का कार्यालय बंद था, लेकिन सूचना मिलते ही वह स्वयं अस्पताल पहुंचे। कानूनी प्रावधानों और भारत सरकार के निर्देशों की जानकारी देकर अस्पताल प्रशासन को शव सौंपने के लिए बाध्य किया गया।

पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
इस कार्रवाई में NHRC के असिस्टेंट रजिस्ट्रार बृजवीर सिंह, सहयोगी राहुल, डीसीपी सेंट्रल दिल्ली हर्षवर्धन मित्तल और एसएचओ सुभाष चंद्र ने भी तत्परता से सहयोग किया। प्रियंक कानूनगो ने मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए अस्पताल संचालकों को “पाश्विक वृत्ति से मुक्ति” की बात कही।

 

सोशल मीडिया पर गुस्सा, हेल्थ सिस्टम पर सवाल
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर्स निजी अस्पतालों पर इलाज के नाम पर लूट और मौत के बाद शव को बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि सरकारी अस्पतालों की मजबूरी और निजी अस्पतालों की मुनाफाखोरी के बीच आम आदमी पिस रहा है।


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