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धान खरीदी व्यवस्था ने बदली महिला किसान चौती बाई की ज़िंदगी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 27 जनवरी 2026,  06:43 PM IST
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धान खरीदी व्यवस्था ने बदली महिला किसान चौती बाई की ज़िंदगी

 रायपुर/ खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के साथ ही छत्तीसगढ़ के गांवों में सिर्फ धान नहीं, बल्कि भरोसे, संतोष और आत्मविश्वास की नई फसल भी लहलहा उठी है। शासन की किसान-हितैषी नीतियों का जीवंत प्रमाण हैं धमतरी जिले के ग्राम संबलपुर की महिला किसान श्रीमती चौती बाई साहू, जिनकी कहानी संवेदनशील शासन और सुशासन की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है।

      अब तक परिवार में धान विक्रय की जिम्मेदारी चौती बाई के पति निभाते रहे थे, लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य कारणों से यह दायित्व उन्होंने स्वयं संभाला। यह उनके लिए केवल धान बेचने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की एक नई यात्रा थी। पूर्व निर्धारित तिथि पर कटे टोकन के अनुसार वे 57 क्विंटल धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं। पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद चौती बाई के चेहरे पर किसी तरह की घबराहट नहीं, बल्कि संतोष और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र की सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-मैत्री व्यवस्था ने पूरे अनुभव को आसान और सम्मानजनक बना दिया। केंद्र में बारदाना, हमाल, डिजिटल तौल मशीन, प्रशिक्षित ऑपरेटर, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।

     धान विक्रय से प्राप्त राशि से चौती बाई अपने पति का बेहतर इलाज कराने की योजना बना रही हैं। उनकी आवाज़ में सरकार के प्रति आभार स्पष्ट महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए संबल साबित हुआ है। इससे खेती न केवल लाभकारी बनी है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा भी मिली है।

चौती बाई मानती हैं कि बढ़े हुए समर्थन मूल्य से उनके परिवार के जीवन में स्थिरता आई है। घर के खर्च, इलाज और भविष्य की जरूरतों को लेकर अब पहले जैसी चिंता नहीं रही। उन्होंने धान खरीदी केंद्र के कर्मचारियों, हमालों और प्रशासनिक अमले की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने सहयोग, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ कार्य किया।

     चौती बाई की कहानी केवल एक महिला किसान की सफलता नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब शासन की नीतियाँ ईमानदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो उनका लाभ सीधे अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुँचता है। आज संबलपुर की चौती बाई सिर्फ धान बेचने वाली किसान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की किसान-केंद्रित नीतियों की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। जिनकी मुस्कान में व्यवस्था पर भरोसा और बेहतर भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई देती है।

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