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प्रयागराज माघ मेला विवाद: निश्चलानंद सरस्वती का बड़ा बयान, बोले—‘अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से नहीं, तामझाम से रोका गया
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 29 जनवरी 2026,  04:12 PM IST
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प्रयागराज माघ मेला विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। इस बीच जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने दुर्ग में बड़ा बयान देकर मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने साफ कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं, बल्कि तामझाम और दिखावे के साथ स्नान करने से रोका गया था।
  1. प्रयागराज माघ मेला विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। इस बीच जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने दुर्ग में बड़ा बयान देकर मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने साफ कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं, बल्कि तामझाम और दिखावे के साथ स्नान करने से रोका गया था

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला क्षेत्र में अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है।

प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत

प्रयागराज की संगम नगरी में मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला क्षेत्र में हुई अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संगम क्षेत्र में सुरक्षा घेरा तोड़ने और प्रतिबंधित मार्ग पर बग्घी ले जाने के आरोपों के बाद उनकी संस्था को आवंटित जमीन और सरकारी सुविधाएं वापस लेने की तैयारी की जा रही है।

मेला प्रशासन ने स्वामी जी को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर बिजली-पानी समेत सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएंगी। साथ ही भविष्य में माघ मेले में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

बैरियर तोड़ने और भगदड़ का खतरा

प्रशासन के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी पांटून पुल नंबर-02 पर लगे सुरक्षा बैरियर को तोड़कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गए। उस समय संगम पर लाखों श्रद्धालु मौजूद थे और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। इस कृत्य से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का गंभीर खतरा बताया गया है।

प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का आरोप

नोटिस में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा रोके जाने पर वहां विवाद की स्थिति बनी, जिससे भीड़ प्रबंधन प्रभावित हुआ। प्रशासन ने इसे आदेशों की सीधी अवहेलना और प्रशासनिक कार्य में बाधा करार दिया है।

‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर सवाल

प्रशासन ने यह भी आपत्ति जताई है कि सर्वोच्च न्यायालय की रोक के बावजूद मेले में स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड लगाए गए, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।

सीएम योगी का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सनातन परंपराओं को बाधित करने का अधिकार किसी को नहीं है। संत समाज का कर्तव्य समाज को जोड़ना है, न कि भ्रम या विवाद पैदा करना।

संत समाज में मतभेद उभरे

 

जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन पर केवल नोटिस भेजने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने प्रशासन से माफी मांगकर विवाद खत्म करने की मांग की है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
अब निश्चलानंद सरस्वती के बयान के बाद संत समाज के भीतर भी इस मुद्दे पर दो राय साफ दिखाई देने लगी है।

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