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बिहार की सियासत में यू-टर्न: RLM में बगावत थमी, नाराज विधायक बैठक में लौटे
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 30 जनवरी 2026,  06:00 PM IST
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नितिन नबीन से मुलाकात बना ‘पॉलिटिकल मैसेज’ नाराज विधायकों की नितिन नबीन से मुलाकात को महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के तौर पर देखा गया। संदेश साफ था—अगर सम्मान और हिस्सेदारी नहीं मिली, तो विकल्प खुले हैं।

पटना में बिहार की राजनीति का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के जिन विधायकों की नाराजगी बीते दिनों सुर्खियों में थी, वे अब पार्टी की बैठक में दोबारा शामिल होते दिखे। इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान फिलहाल थमती नजर आ रही है।

बीते कुछ हफ्तों से RLM में सब कुछ सामान्य नहीं था। पार्टी के चार में से तीन विधायक—बाजपट्टी से रामेश्वर महतो, दिनारा से आलोक सिंह और मधुबनी से माधव आनंद—की दूरी ने सियासी हलचल बढ़ा दी थी। लिट्टी-चोखा भोज से गैरहाजिरी, पार्टी बैठकों से दूरी और भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात ने यह संकेत दे दिया था कि मामला गंभीर है। जेडीयू या बीजेपी में जाने की अटकलें भी तेज हो गई थीं।

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नाराजगी की वजहें क्या थीं?
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों को लग रहा था कि पार्टी में उनकी राजनीतिक भूमिका सीमित कर दी गई है। संगठनात्मक फैसलों में उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा था। वहीं उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्रिमंडल में संभावित प्रवेश को लेकर भी अंदरखाने असंतोष की चर्चा थी। परिवारवाद के आरोपों ने आग में घी का काम किया।

नितिन नबीन से मुलाकात बना ‘पॉलिटिकल मैसेज’
नाराज विधायकों की नितिन नबीन से मुलाकात को महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के तौर पर देखा गया। संदेश साफ था—अगर सम्मान और हिस्सेदारी नहीं मिली, तो विकल्प खुले हैं।

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उपेंद्र कुशवाहा का मास्टरस्ट्रोक
इसी मोड़ पर उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा दांव चला। उन्होंने बिहार इकाई के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज की और दिनारा से विधायक लोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नया पावर सेंटर खड़ा किया। कार्यकारी अध्यक्ष और अन्य पदों पर संतुलित नियुक्तियों के जरिए पार्टी को ‘वन मैन शो’ की छवि से बाहर निकालने की कोशिश की गई।

इस कदम से नाराज नेताओं को संदेश गया कि पार्टी अब सामूहिक नेतृत्व और संरचित संगठन की ओर बढ़ रही है।

 

बैठक में दिखी एकजुटता
आज की बैठक में माधव आनंद समेत वे चेहरे भी मौजूद रहे, जिनकी दूरी चर्चा में थी। यह दृश्य राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इससे साफ है कि RLM में फिलहाल बगावत पर ब्रेक लग गया है।

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